
शक्ति सिंह/ कोटा. कोटा शहर के रहने वाले और पेशे से पेंटर शंभूसिंह चौबदार के पास बड़ी संख्या में लोग पीलिया व निमोनिया जैसी बीमारियों का इलाज कराने आते हैं. चौबदार का दावा है कि वे जंगल से जड़ी—बूटियां और औषधियां लाकर बीमार लोगों का उपचार करते हैं और उनकी दवा लेने से लोग ठीक हो जाते हैं. शंभूसिंह बताते हैं कि उनके पिता दुर्गादास वैद्य थे. वे जंगल से देसी जड़ी बूटियां ला कर लोगों का कई प्रकार के रोगों का इलाज करते थे. पिता ने ही शंभूसिंह को भी देसी जड़ी बूटियों से इलाज करना सिखाया.
शंभूसिंह बताते हैं कि वे जंगलों में मौजूद जड़ी-बूटी से बीमारी का इलाज करते हैं. जगलों व पहाड़ में कई जीवनदायी औषधीय पौधे हैं. फेफड़ों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बीमारी निमोनिया में कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है. नीम के पौधों का उपयोग भी इस बीमारी में होता है. नीम की दातून करने व पत्तों का रस पीने से भी बीमारी में फायदा मिलता है.
शंभू सिंह ने बताया कि इनके यहां प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आते हैं. कोटा और कोटा के आसपास के क्षेत्रों से आते हैं. कई वीआईपी लोग और कई नेता लोगों के परिवारों ने भी इनसे इलाज करवाया है. एक हफ्ते में पीलिया जैसी बीमारी को नॉर्मल कर देते हैं. यह देसी जड़ी बूटी की एक माला पहनाते हैं. जो पीलिया उतरने के साथ धीरे-धीरे बढ़ती जाती है. इनके द्वारा दी गई दवाई डॉक्टर की दवाई के साथ भी ले सकते है.
शंभू के पास आए पीलिया के मरीजों ने बताया कि काफी दिनों से पीलिया हो रहा थात्र डॉक्टर का भी इलाज करवाया. लेकिन किसी भी तरह से कोई फायदा नहीं हुआ. परिचित ने शंभू सिंह के बारे में बताया तो यहां पर आते हुए 5 से 6 दिन हुए हैं. इनके द्वारा दी गई जड़ी बूटियों और झाड़े से काफी फायदा हो रहा है.
नोट: news18 इन देसी जड़ी बूटियों से की गई इलाज की पुष्टि नहीं करता, इलाज के लिए रजिस्टर्ड डॉक्टर की ही सलाह ही लें.
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FIRST PUBLISHED : June 18, 2023, 17:40 IST






