आखिर कैसे बनता है काजू? सफेद-सफेद दानों के पीछे इतनी मेहनत, एक-एक बीज है कीमती


ड्राई फ्रूट्स लोगों को काफी पसंद आते जहां हेल्थ के लिहाज से ये काफी अच्छे होते हैं वहीं इसका टेस्ट भी काफी पसंद किया जाता है. दुनिया में कई तरह के ड्राई फ्रूट्स मौजूद हैं. किशमिश, काजू, खजूर से लेकर अखरोट और कई फलों के बीज अब ड्राई फ्रूट्स में शुमार किये जाते हैं. इनका प्राइस हमेशा से थोड़ा ज्यादा रहता है. खासकर काजू का. आमतौर पर अगर मार्केट प्राइस की बात करें तो काजू आठ सौ से बारह सौ और इससे भी अधिक रेंज में आपको मिल जाएगा. लेकिन अगर आप इसकी मेकिंग की प्रक्रिया देखेंगे तो समझ जाएंगे कि ये इतना महंगा क्यों है?

सोशल मीडिया पर काजू के मेकिंग का एक वीडियो शेयर किया गया. लोग इस वीडियो को देखने के बाद अचम्भित है. हमारे घरों में जो सफ़ेद सफ़ेद काजू आता है, उसे बनाने में काफी मेहनत लगती है. जी हां, जिस काजू को हम मुट्ठी में भरकर चबा जाते हैं, उसके एक एक दाने की सफाई में कई मजदूरों की मेहनत छिपी हुई है. आप भी वीडियो देखने के बाद काजू की कीमत का अंदाजा लगा लेंगे. फिर आपको समझ आएगा कि आखिर ये ड्राई फ्रूट इतना महंगा क्यों आता है?


काला होता है कच्चा काजू
जिस सफ़ेद काजू को आप एन्जॉय करते हैं, उसके बीज को पहले भट्टी में पकाया जाता है. इससे कच्चे फल का शेल काला हो जाता है. इस भुने हुए शेल को फिर हाथ से तोड़ा जाता है.मजदूर बैठकर इस शेल को तोड़ते हैं. इसके बाद इसके अंदर से काजू को अलग किया जाता है. फिर मशीनों के जरिये चुने हुए काजू को भी अलग-अलग किया जाता है. इसमें टूटे हुए काजू एक तरफ और पूरे काजू एक साइड होते हैं. मार्केट में टूटे काजू थोड़े सस्ते दाम में मिलते हैं. जबकि पूरे काजू का प्राइस थोड़ा ज्यादा होता है.

Tags: Ajab Gajab, Khabre jara hatke, Weird news

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया