सैयद सैफुद्दीन जिलानी म्यूजियम, यहां क़ुत्बुल हिंद की लिखी 900 साल पुरानी कुरान शरीफ सहित कई ऐतिहासिक चीजें देखने को मिलेगी

कृष्ण कुमार / नागौर. नागौर में कादरी संप्रदाय की दरगाह स्थित है. यह दरगाह हज़रत सैयद सैफुद्दीन वहाब जिलानी की है. जिन्हें बड़े पीर के नाम से भी जाना जाता है. इस दरगाह में बड़े पीर से जुडी़ सामग्री और उनके वंशजो से जुड़ी हुई ऐतिहासिक वस्तुओं का अनूठा संग्रह किया गया है. इस म्यूजियम को सैयद सैफुद्दीन जिलानी म्यूजियम के नाम से भी जाना जाता है.

नागौर में स्थित क़ुत्बुल हिंद यानि हज़रत सैयद सैफ़ुद्दीन अब्दुल वहाब जिलानी की दरगाह. यह कादरी संप्रदाय की भारत में सबसे बड़ी दरगाह है. इस दरगाह में एक म्यूजियम बना हुआ है. म्यूजियम की खास बात यह है कि यहां पर क़ुत्बुल हिंद का अमामा शरीफ (पगड़ी), असा मुबारक छड़ी और क़ुत्बुल हिंद के हाथ से लिखी कुरान है. वहीं मुगल बादशाह औरंगजेब के द्वारा उस वक्त मौजूद दरगाह बड़े पीर साहब के सज्जादा नशीन सैयद हामिद अली को भेंट की गई शाही पालकी भी देखने को मिलती है. इसके अलावा जोधपुर के महाराजा मानसिंह के द्वारा जागीर के लिए दिए गए ताम्र पत्र भी देखने को मिलते है.

900 साल पुरानी कुरान शरीफ सहित कई ऐतिहासिक चीजें मौजूद
दरगाह के सज्जादा नशीन सैयद सदाक़त अली जीलानी के पुत्र सैयद सैफुद्दीन जिलानी ने बताया कि इस म्यूजियम में क़ुत्बुल हिंद की 900 साल पुरानी हाथ से लिखी हुई कुरान शरीफ मौजूद है. इस म्यूजियम में इनकी असा मुबारक (छड़ी) और अमामा शरीफ (पगड़ी) मौजूद है. यहां की खास बात है कि सैकड़ों वर्ष पुराने शुतुरमुर्ग के अंडे देखने को मिलते हैं. वहीं क़ुत्बुल हिंद के वंशजो की ऐतिहासिक चीजें देखने को मिलती है. इस म्यूजियम में पांच इंच की तोप, सैयद हामिद अली को औरंगजेब द्वारा दी गई पालकी और बीकानेर दरबार द्वारा दिया खासा और बगदाद स्थित गोस-ए-आजम के गुबंद की ईंट और मजार की चादर देखने को मिलती है.

सभी धर्म के लोग मुफ्त में देख सकते है म्यूजियम
सैयद सैफुद्दीन जिलानी ने बताया कि बाकी अन्य म्यूजियम को देखने के लिए टिकट लेनी पड़ती है. लेकिन यह म्यूजियम बिल्कुल फ्री है. यहां पर किसी प्रकार की टिकट नहीं लेनी पड़ती है. म्यूजियम सुबह 5 बजे खुलता है और रात को 9 बजे बंद होता है. इस म्यूजियम को हर धर्म से जुडे़ हुऐ लोग मुफ्त में देख सकता है.

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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 12:10 IST

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Author: Jagran Times

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