आदिवासियों के लिए पर्यटन विभाग बना रहा चार सामुदायिक भवन, करोड़ों खर्च करेगी सरकार


आकाश गौर/मुरैना. मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पर्यटन विभाग 50-50 लाख की लागत से सामुदायिक भवन बनवा रहा है. यह भवन जिले के अलग-अलग चार ब्लॉक में बनवाए जा रहे हैं. यह सौगात आदिवासी लोगों के लिए अच्छी पहल साबित होगी, क्योंकि अब यह लोग व्यवस्थित जगह पर अपने बच्चों की शादी और अन्य समारोह बड़ी आसानी से कर सकते हैं. वर्तमान में आदिवासी अभी झोपड़ी या खुले मैदानों शादी समारोह व अन्य कार्यक्रम आयोजित करते हैं.

इसके लिए आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा ढाई करोड़ की लागत से चार स्थानों पर सामुदायिक भवन बनाए जा रहे हैं. मध्यप्रदेश शासन द्वारा इसकी निर्माण एजेंसी पर्यटन विभाग को बनाया गया है. जिले में सभी जगह लगभग यह कार्य शुरू हो चुका है. सिर्फ पहाड़गढ़ विकासखंड के कन्हार में निर्माण पूर्णता की ओर है.

यहां और बनाए जा रहे हैं भवन

जानकारी के लिए आपको बता दें कि शासन की मंशा है कि आम आदमी की तरह आदिवासी परिवार भी व्यवस्थित स्थानों में शादी समारोह व अन्य कार्यक्रम कर सकें. इसके लिए जौरा, कैलारस, पहाड़गढ़, और सबलगढ़ विकास खंड में सामुदायिक भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है. जौरा, कैलारस, सबलगढ़ में विकासखंड मुख्यालय पर जमीन मिल गई, तो वहीं पर 50- 50 लाख की लागत से सामुदायिक भवनों का निर्माण करवाया गया है.

इन भवनों में ये रहेंगी सुविधाएं

इन सामुदायिक भवनों में कमरे, किचन, वॉशरूम, बाथरूम, आधुनिक शौचालय, बड़ा खुला बरामदा सहित पानी, बिजली की सुविधा दी गई है. राहुल शर्मा सब इंजीनियर पर्यटन विभाग ने बताया कि जौरा, कैलारस, पहाड़गढ़ और सबलगढ़ विकास खंड में आदिवासियों के लिए सामुदायिक भवन बनाने की राशि जारी हुई थी. उनका निर्माण पर्यटन विभाग कर रहा है. पहाड़गढ़ के लिए 1 करोड़ और तीनों के लिए 1.5 करोड़ रुपए की राशि जारी हुई है.

Tags: Latest hindi news, Morena news, Mp news

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया