
जुगल कलाल / डूंगरपुर. आदिवासी घरों में बकरी पालन उनकी संस्कृति का हिस्सा है. डूंगरपुर ज़िले की आदिवासी महिला बकरी पालन की बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं, जिसका फायदा इस समय उन्हें मिल रहा है. ऐसी ही डूंगरपुर की एक महिला हैं ललिता कटारा. ललिता बकरी पालन से अच्छा मुनाफा काम रही है और अपने परिवार भरन पोषण कर रही है. कुछ समय पहले तक मजदूरी करने वाली ललिता ने जब से बकरी पालन किया है तब से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बदल गई है. मजदूरी कर दिन के 200 से 300 रुपए कमाने वाली ललिता अब महीने के 50 से 60 हजार रुपए आसानी से कमा लेती हैं.
डूंगरपुर के झोथरी ब्लॉक के पाडली वीर सिंह गांव की रहने वाली ललिता कटारा की बकरी पालन से कुछ समय में ही जिंदगी पूरी तरह बदल गई. बचपन से बकरी पालन कैसे होता है. इसके बारे में ललिता भलीभांति जानती थी. उसी का इस्तेमाल कर ललिता ने बकरी पालन शुरू किया. बकरी पालन में ललिता की खासियत ये रही, कि उन्होंने देशी बकरियों की नस्ल की बजाय सिरोही नस्ल की बकरियों को पालन शुरू किया. सिरोही नस्ल की बकरियां साल में 2 बार बच्चें देती हैं और देसी बकरियों के मुकाबले दूध भी ज्यादा देती है. बकरी पालन में ललिता का परिवार भी उसकी पूरी मदद करता है.
उन्होंने ने बताया कि बकरी पालन की शुरुआत मात्र दो बकरियों से की थी. आज उनके पास 35 से 40 बकरियां है. हर महीने लगभग 2 से 3 बकरे में बाजार बेचती है. एक बकरे की कीमत 7 हजार से 10 हज़ार के बीच होती है. इसके अलावा बकरियों के दूध से भी उन्हें अच्छी आय हो जाती है. साथ ही ललिता ने सिरोही नस्ल के साथ-साथ देशी नस्ल की बकरियां और बकरे भी पाल रही है. देशी नस्ल के बकरे बेचने से भी अच्छा मुनाफा होता है.
अन्य महिलाओं के लिए भी बनीं प्रेरणा
बकरियां पालन से ललिता ना केवल खुद आत्मनिर्भर बन रही है, बल्कि अपने परिवार की भरन पोषण की भी जिम्मेदारी उठा रही हैं. ललिता को देख आस पास की महिलाओ ने भी बकरी पालन शुरू कर दिया है. ललिता बताती है कि आप कितना पढ़े लिखे है, ये जरूरी नहीं बस आपके इरादे मजबूत होने चाहिए. ललिता अब बकरी पालन के साथ साथ मुर्गी पालन भी कर रही. ललिता मुर्गी और उनके अंडे बेचकर भी अच्छी कमाई कर रही हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 09:47 IST






