इस शिक्षक ने पेश की मिसाल, दिव्यांग होने के बावजूद बच्चों के जीवन में भर रहे हुनर के रंग

अर्पित बड़कुल/दमोह. दमोह जिले में शिक्षा के स्तर में काफी हद तक सुधार देखने को मिल रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की मुख्य भूमिका उन शिक्षकों की देन है, जिन्होंने अपने काम को नैतिक जिम्मेदारी मानकर किया है. उन्हीं में से एक शिक्षक मोहन सिंह हैं, जो एक पैर से दिव्यांग होने के बावजूद अपने कर्तव्य को बखूबी निभा रहे हैं. जिले के पथरिया ब्लॉक के शासकीय माध्यमिक शाला सतौआ में पदस्थ शिक्षक मोहन सिंह हर साल जून माह में शुरू होने वाले समर कैंप के जरिए बच्चों को गीत, संगीत और चित्रकला जैसी शिक्षा देते हैं.

यह शिक्षक गढ़ाकोटा जिला सागर के रहने वाले हैं, जो प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे बस में सफर करते हुए तीन से चार हिंदी समाचार पत्रों को लेकर बच्चों के बीच विद्यालय में सुबह 07:00 बजे पंहुचते हैं. बच्चों को म्यूजिक के साथ-साथ योग, व्यायाम और नैतिक शिक्षा भी देते हैं. पाठशाला में विभिन्न गतिविधियां भी संचालित कराई जा रही हैं. जैसे बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रेरित करना खेल-खेल में बच्चों को अंक, संख्या, जोड़, घटाना, गुणा, भाग के साथ अक्षर, मात्राएं, शब्द आदि बनाना बच्चों को सिखाया जा रहा है.

बच्चों को सिखाए जाते हैं कई गुर

खेलकूद के साथ बच्चों को हारमोनियम, ढोलक, गिटार बजाना सिखाया जा रहा है. गीत, भजन, कविता, कहानियां आदि से कैंप का संचालन मनोरम रूप से संचालित हो रहा है. पाठशाला में पढ़ने वाले छात्र अजय अठ्या ने बताया कि हमारे सर सुबह 7 बजे विद्यालय पहुंच कर हमें खेल, योग, व्यायाम और भी अन्य गतिविधियों के बारे में बताते हैं. दिव्यांग होने के बाद भी हमारे सर क्षेत्र में सहायता करते हैं.
बच्चों के परिजनों ने शिक्षक के कार्य की सराहना की है. साथ ही इस समर कैम्प को बच्चों के समय का सदुपयोग बताया. इस पहल को लेकर पूरा गांव शिक्षक के समर्थन में है. वहीं, शिक्षक मोहन सिंह ने बताया कि हमारे विद्यालय में बच्चों को बागवानी, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सजकता, गीत-संगीत और चित्रकला की नैतिक शिक्षा बच्चों को दी जाती है.

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