हाइलाइट्स
Time Etc ने मैनेजर्स की जगह कोच हायर किए हैं.
मैनेजर्स के हटने के बाद कर्मचारी पहले से ज्यादा खुश और प्रोडक्टिव हैं.
Time Etc एम्प्लॉयी एन्गेजमेंट में टॉप में बना हुआ है.
नई दिल्ली. कबीरा इस संसार में भांति-भांति के लोग… ये तो कबीर दास ने कहा था. हम ऐड कर देते हैं कि इस संसार में भांति-भांति की कंपनियां भी हैं. पर कंपनियां कैसी भी हों, सबका एकमात्र फोकस होता है प्रोडक्टिविटी और रिजल्ट्स पर. तमाम कंपनियां यही फॉर्मूला क्रैक करने में लगी हैं कि ऐसा क्या करें कि कर्मचारी खुश भी रहें और उनकी प्रोडक्टिविटी दिन दूनी, रात चौगुनी बढ़ती रहे.
Time Etc नाम के एक अमेरिकी वर्चुअल असिस्टेंस प्लैटफॉर्म ने प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का एक नया तरीका खोज निकाला है और ये तरीका सक्सेसफुल भी साबित हुआ है. कंपनी ने अपने मैनेजर्स को कोच से रिप्लेस कर दिया. हर कोच को छह कर्मचारियों की एक टीम दी गई. इन कोचेस का काम अपनी टीम के कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाकर उनके फुल पोटेंशियल तक पहुंचाना था. इसके लिए कोच अपनी टीम को लगातार मेंटर करेगा, उन्हें रेगुलर फीडबैक देगा और उनकी क्षमताओं के हिसाब से उन्हें गाइडेंस देगा.
ये कदम कंपनी ने क्यों उठाया?
साल 2022 में गैलप का एम्प्लॉयी एन्गेजमेंट पर एनुअल सर्वे आया. इस सर्वे में सामने आया कि एम्प्लॉयी एन्गेजमेंट 7 साल में सबसे कम है. केवल एक तिहाई कर्मचारी अपने काम से जुड़ाव महसूस कर रहे थे. इस रिपोर्ट से कंपनी को लॉन्ग टर्म प्रोडक्टिविटी और एम्प्लॉयी सैटिस्फैक्शन को लेकर चिंता होने लगी. इस सर्वे में कई की फैक्टर्स सामने आए जिनकी वजह से कर्मचारी एन्गेज्ड फील नहीं कर रहे थे. इनमें एक्सपेक्टेशन में क्लैरिटी का न होना,सीखने और ग्रोथ के मौके कम होना, कर्मचारी के स्किल्स का सही इस्तेमाल नहीं होना, सेंस ऑफ पर्पस में कमी, अंडरवैल्यूड और अनअप्रीशिएटेड महसूस करना आदि शामिल थे.
कई रिपोर्ट्स में ये सामने आया है कि जिन कंपनियों में कर्मचारी खुश होते हैं और कंपनी से जुड़ाव महसूस करते हैं, वहां प्रोडक्टिविटी भी बेहतर होती है.
मैकिन्से की रिसर्च में भी यही बात सामने आई. मैकिन्से की रिसर्च के मुताबिक, ग्रेट रेजिग्नेशन फिनोमिना के दौरान इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों में से 54 प्रतिशत कर्मचारी वैल्यूड फील नहीं कर रहे थे, 51 प्रतिशत का ऐसा लग रहा था कि वो उस जगह पर बिलॉन्ग नहीं करते हैं, 52 प्रतिशत को लगता था कि उनके मैनेजर्स उन्हें अप्रीशिएट नहीं करते हैं. जब कर्मचारी एन्गेज्ड महसूस नहीं करते हैं तो वो नए ऑप्शंस की तलाश करते हैं, वहीं जो कर्मचारी रुकते हैं, उनकी प्रोडक्टिविटी प्रभावित होती है.
इन रिपोर्ट्स को ध्यान में रखते हुए Time Etc ने लोगों को हायर करते समय उनसे पूछना शुरू किया कि वो अपने मैनेजर से क्या चाहते हैं. उन्होंने जो बताया उससे कंपनी के समझ में आया कि लोगों को असल में कोच चाहिए, न कि मैनेजर. इसके बाद ही कंपनी ने मैनेजर्स को कोचेस से रिप्लेस करने का फैसला किया.
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कंपनी ने अपने इकोसिस्टम में सेल्फ इम्प्रूवमेंट के कल्चर को इंटीग्रेट किया है. कर्मचारियों को पर्सनल डेवलपमेंट में इनवेस्ट करने के लिए मंथली अलाउंस दिया जाता है. वो इसमें कोई कोर्स कर सकते हैं या फिर किताबें खरीद सकते हैं. कोचेस अपने कर्मचारियों को रिलेवेंट रीडिंग मटेरियल रिकमेंड करते हैं. इसके साथ ही कंपनी माइंडफुलनेस की एक्सरसाइज़ और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग के लिए रेगुलर वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ करती है. इसमें बाहरी एक्सपर्ट्स कर्मचारियों को गाइड करते हैं.
मैनेजर्स को हटाने का क्या असर हुआ?
बदलावों के बाद से Time Etc गैलप के एम्प्लॉयी एन्गेजमेंट सर्वे में टॉप 1 प्रतिशत में बना हुआ है. इम्पल्स के एक सर्वे में सामने आया है कि भरोसा, सपोर्ट और एन्गेजमेंट के बीच का कनेक्शन साफ पता चलता है. एम्प्लॉयी एन्गेजमेंट बढ़ने का फायद एम्प्लॉयीज़ की प्रोडक्टिविटी पर भी पड़ा है. कंपनी में लोगों के सिक डेज़ में कमी आई है, वहीं उनकी परफॉर्मेंस में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 19:07 IST






