
नरेश पारीक/ चूरू. दुनिया में ईश्वर से भी बड़ा सर्वोच्च स्थान किसी का है तो वो मां का है. मां की महानता की बातें हमारेवैदिक ग्रन्थ एवं वेद-पुराणों में भी हैं. दर्द और संघर्ष से भरी चूरू की इस मां की कहानी सुनने में भले ही फिल्मी लगे लेकिन है सत्य. जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के पास भोजनालय चलाने वाली चंदा आज दो बेटियों की मां हैं. चंदा के द्वारा संचालित किए जा रहे आज इस भोजनालय को शुरू करने की जितनी कहानी दिलचस्प है उतना ही कठिन तीन बरस पहले चंदा का संघर्ष था.
बच्चों के दूध तक के पैसे नहीं थे
अस्पताल के पास भोजनालय चलाने वाली चंदा बताती हैं कि लॉक डाउन में उसके पति की जॉब चली गयी. ऐसे में मकान का किराया देना दूर की बात उनके लिए दो समय का भोजन जुटाना भी काफी कठिन था. चंदा बताती की उसी समय वह गर्भवती थी और एक 13 साल की बच्ची थी, जिसके लिए दूध के उनके पास पैसे नही थे और आस-पड़ोस के लोगों से बच्चों के लिए दूध लेते. चंदा बताती हैं कि उसी दरमियान उसके आपरेशन से प्रसव हुआ और दूसरी बेटी हुई. पहले से संघर्षो के दौर से गुजर रही चंदा के सामने अब दो बच्चियों के साथ अपना और अपने पति का पेट भरने कीचुनौती थी. ऐसे में चंदा ने सिजेरियन प्रसव के दो माह बाद ही अस्पताल के पास घर से गैस चूल्हा लॉकर अपना भोजनालय शुरू कर दिया.
पति को कार दिलाकर बनाया आत्मनिर्भर
अस्पताल के पास पिछले 3 बरस से भोजनालय चला रही चंदा बताती हैं कि शुरुआती दिनों में काफी झिझक महसूस हुई और सड़क किनारे खाना बनाने में काफी परेशानी आई. लेकिन 13 साल की बेटी और पति ने खूब सहयोग किया. इसके बाद जैसे-जैसे भोजनालय चलने लगा वैसे-वैसे एक थड़ी लगा ली और तिरपाल और अन्य जरूरी सामान खरीदे और आज चंदा ने अपने इस भोजनालय के दम पर फाइनेंस पर कार खरीदकर पति को भी रोजगार मुहैया करवा दिया. अब उनके पति किराए पर कार चलाते हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रहे हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 18:09 IST






