ससुराक वालों के तानों के चलते पिता ने खुदवाया था चमत्कारी तालाब, आज तक नहीं सूखा, आसपास के गांव भी उठा रहे फायदा

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प्रतापा‌ राम / जैसलमेर. रेगिस्तान की जीवटता का कोई सानी नहीं है. यहां ना प्रकृति कभी मेहरबान रही और न अकाल न पीछा छोड़ा. पानी की किल्लत हमेशा से बनी रही. ऐसे समय में भी यहां के लोगों ने जीवन के आगे हताश नहीं हुए. पानी की आपूर्ति के लिए लोगों ने कुएं बेरीयां खोदी. इसी तरह का जसेरी नामक तालाब जैसलमेर से बीस किलोमीटर दूर जाजिया के पास डेढा गांव में स्थित है. इस तालाब का पानी सदियों से कभी सूखा नहीं है. परंपरागत जल संरक्षण की संस्कृति का प्रतीक जसेरी तालाब सदियां बीत जाने के बाद भी आज तक कभी भी सूखा नहीं है. कुदरत का करिश्मा कहा जाए या पूर्वजों का वरदान इस तालाब ने जैसलमेर के पालीवाल संस्कृति के चौरासी गांवों की प्यास उस जमाने में भी बुझाई और आज भी आस पास के दर्जन भर गांवों की प्यास बुझा रहा है. कई बार क्षेत्र में तीन-तीन, चार-चार साल बारिश नहीं होने के बावजूद भी यह तालाब कभी रीता नहीं हुआ. प्रतिदिन आस पास के दर्जन भर गांवों से पचास से अधिक टैकर इस तालाब से भर कर जाते है.

महिला के पिता ने बनवाया था तालाब

इस तालाब की तस्वीर दिल्ली के विज्ञान भवन में राजस्थान के परंपरागत पेयजल स्रोतों की समृद्ध संस्कृति का बखान कर रही है. पर्यटकों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इस तालाब के बारे में महेंद्र सिंह ने बताया की 6 सौ साल पहले जब यह क्षेत्र पालीवाल संस्कृति का हिस्सा था, उस वक्त पास के गांव जाजिया में पालीवाल जाति के एक सेठ की लड़की की शादी हुई उस वक्त पानी के लिए पनिहारी जाना पड़ता था. इस युवती का नाम जसोदा था. जसोदा एक दिन ससुराल से घड़ा लेकर पानी भरने गांव के कुएं पर गई जहां एक पशुपालक अपने पशुओं को पानी पिला रहा था. पशु अधिक थे. यह देख कर युवती ने पशुपालक से आग्रह किया कि उसे एक घड़ा भरवा दे ताकि समय पर घर जाकर खाना बना सके. लेकिन पशु पालक ने उसकी नहीं सुनी. ये घटना जब ससुराल में घर पर जाकर बताई तो जसोदा के देवर ने कहा कि यहां तो ऐसे ही पानी मिलेगा. अगर जल्दी पानी लाना है तो अपने पिताजी को बोल दो कि घर के आगे तालाब खुदवा दे.

इसके बाद पिता जसराज ने बेटी के कहने पर डेढ़ा गांव के आगोर में जाजीया गांव के पास एक तालाब खुदवाया. जिसके पानी का बहाव क्षेत्र तो डेढ़ा गांव की तरफ से है और भराव क्षेत्र जाजीया में पड़ता है. तालाब बीच में करीब 15 फुट गहरा है. बताया जाता है कि तालाब के बीच में ही पगबावड़ी की तरह कुआ बनाकर उसमें जसराज ने ताम्रपत्र लगवाया, लेकिन आज तक पानी नहीं सूखने से यह दिखा नहीं. तालाब पर दो पठियाल और खेतपाल का मंदिर बना हुआ है.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 15:02 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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