अलवर शहर का एकमात्र पार्क जहां लोग उठा रहे बोटिंग का लुत्फ़, नेहरू उद्यान बना आकर्षण का केंद्र

पीयूष पाठक / अलवर. लोग मनोरंजन के लिए अलग-अलग सहारा ढूंढते हैं. इन दिनों स्कूल की गर्मियों की छुट्टी के चलते भी लोग मनोरंजन के कई तरह के सहारा ले रहे हैं. जहां शहरवासी नेहरू उद्यान में शाम के समय अपने परिवार के साथ आते हैं. यहां इन दिनों अच्छी भीड़ दिखाई दे रही है. इसका प्रमुख कारण यह है कि नेहरू उद्यान अलवर शहर का एकमात्र ऐसा पार्क है, जहां लोगों के लिए बोटिंग की सुविधा है. लोग यहां पर बोटिंग का लुफ्त उठा रहे हैं. नेहरू उद्यान में बोटिंग की शुरुआत 2017 में यूआईटी द्वारा की गई. इसके बाद से ही यहां पर बोटिंग करने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है.

अलवर शहर में वैसे तो बहुत से पार्क है, जहां पर लोग टहलने के लिए निकलते हैं. लेकिन कहा जाए कि मनोरंजन की दृष्टि से नेहरू उद्यान लोगों की पहली पसंद बन रहा है. क्योंकि नेहरू उद्यान जिले का पहला पार्क होगा. जिसमें यहां आने वाले लोगों को बोटिंग की सुविधा मिल रही है. इस सुविधा का लोग जमकर मजा उठा रहे हैं. गर्मियों की छुट्टी के चलते यहां पर अच्छी संख्या में लोग बोटिंग के लिए आ रहे हैं.

टिकट इंचार्ज चंद्र प्रकाश ने बताया कि गर्मियों में लोगों की संख्या यहां पर बढ़ जाती है. इसके लिए हमारी तरफ से तैयारियां पहले ही की जा चुकी है. हमारे यहां पर 3 बोट संचालित है. यह सभी पेडल बोट है. जिसमें 1 बोट में करीब 8 लोग एक बार में आनंद ले सकते हैं. 5 साल से छोटे बच्चों का टिकट 10 रुपये है. वहीं 10 साल से बड़े का टिकट 20 रुपये है. जिसमें तीन राउंड लोगों को घुमाया जाता है. वीकेंड को यहां पर आने वाले लोगों की संख्या अच्छी रहती है. पार्क में लोगों के लिए बोटिंग की सुविधा सुबह 8 बजे शुरू हो जाती है. जो रात 10 बजे तक जारी रहती है. यहां बोटिंग में 3 लोगों का स्टाफ है. जिसमें दो ऑब्जर्वर हैं जो वोट की देखभाल करते हैं और एक टिकट इंचार्ज है.

लोगों को यहां घूमने में आ रहा काफी मजा
बोटिंग करने आए रमनदीप ने बताया कि नेहरू पार्क में बोट चलना एक अच्छी खबर है. क्योंकि यहां आस-पास के लोग घूमने के लिए आते हैं. जिनमें उन्हें बोटिंग का आनंद लेने का भी अवसर मिलता है. नहीं तो लोगों को बोटिंग का आनंद लेने के लिए सिलीसेढ़ झील जाना पड़ता था. लोग अपने छोटे बच्चों के साथ पार्क आते हैं और यहां पर ही बोटिंग का आनंद ले रहे हैं.

.

FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 13:34 IST

Source link

Jagran Times
Author: Jagran Times

Leave a Comment

Read More

उत्तर प्रदेश के बांदा निवासी 9 वर्षीय पुत्र ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया 2 मिनट में 200 देश के झंडे पहचान कर बताने वाला पार्थ झा नमक बच्चों ने इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है माता-पिता वर्तमान में मुंबई में रहते हैं डॉक्टर जे विक्रम चाइल्ड स्पेशलिस्ट चाइल्ड केयर नर्सिंग होम के मालिक मामा है मामा जी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उनका भांजा पार्थ झा ने 2 मिनट में 200 देश के फ्लैग पहचान कर बताने में महारत हासिल की है महाराष्ट्र राज्य में स्थित संस्था ने गोल्ड मेडल और एक प्रमाण पत्र दिया है इस वक्त उसका नाम इंटरनेशनल बुक ऑफ़ रिकार्ड्स मैं दर्ज किया गया है भांजा और बहन पार्थझा मां जयश्री पिता अशोक झा बांदा के रहने वाले हैं हालांकि इसमें कोई शक नहीं है इतनी कम उम्र में 200 देश के झंडों का पहचान करना यह एक चमत्कार ही है दिमाग इस बच्चे का कंप्यूटर की तरह कार्य कर रहा है बांदा का लाल मुंबई में रहकर नाम पैदा कर रहा है सिर्फ बांदा भर का नहीं पूरे विश्व में भारत का नाम ऊंचा किया