बाजरा नेपियर संकर घास: अब एक ही खेत में सालभर होगा हरा चारा, ऐसे तैयार करें उत्पादन मॉडल

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सुनील रजक/शिवपुरी. जिला प्रशासन, कृषि विज्ञान केन्द्र और पशुपालन विभाग की पहल से नवाचार घटक में बाजरा नेपियर संकर घास के साथ मौसमी हरे चारे की साल भर उपलब्धता के मॉडल को कृषि विज्ञान केन्द्र पर तैयार कराया गया है. यहीं से जिले में ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों में भी कई किसान रोपण सामग्री ले जाकर स्थापित कर रहे हैं.

ऐसे लगाएं बाजरा नेपियर संकर घास 

इस घास को लगाने के लिए आगामी वर्षा (जुलाई-अगस्त) के मौसम में रोपण करें. वहीं जिस खेत में लगाना चाहते हैं इससे पूर्व वहां खेत की तैयारी अभी से करें. इसे खेत की मेढ़ों पर भी लगाया जा सकता है. सामान्यतः चारा फसलों को स्थान कम दिया जाता है, लेकिन इस मॉडल में भूमि का कुशलता उपयोग करते हुए 3-3 मीटर की दूरी पर कतारों में बाजरा नेपियर संकर घास की रूट स्लिप्स को 45 डिग्री एंगल पर एक तिहाई भाग जमीन के अंदर दबाते हुए 0.5 से 1 मीटर पौधों में अंतर रखते हुए एकल या दो लाइनों में रोपण करना चाहिए.

खरीफ और रबी की होती है खेती 

कतारों में तीन मीटर अंतर से लगाए जाने पर अंतर्वर्ती स्थानों में आसानी से यांत्रिक तरीके से खेती की तैयारी के लिए ट्रैक्टर चलाया जा सकता है और कतारों के बीच के स्थानों में मौसमी हरे चारे खरीफ में लोबिया/ग्वार व रबी में बरसीम/लूसर्न/जई लगाया जाता है. इससे कार्बोहाइड्रेट एवं प्रोटीन से परिपूर्ण हरे चारे का संयोजन उपयुक्त उत्पादन पशुओं के लिए होता रहता है. इससे दाने की निर्भरता भी कम होने से डेयरी खर्च के व्यय में कमी भी लाई जा सकती है. हरा चारा उत्पादन मॉडल से 200 से 250 टन/हे./वर्ष हरा चारा प्राप्त हो जाता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तकनीक से वर्ष भर पशुधन के लिए हरे चारे की प्राप्ति होती रहती है, जिससे स्टॉल फीडिंग में बहुत मदद होती है.

हरे चारे का वर्ष भर होता है उत्पादन  

डॉ.अमरेश चन्द्रा, निदेशक, डॉ.ए.के.रॉय परियोजना प्रभारी पी.सी.एफ.सी. एवं डॉ. विजय यादव विभागाध्यक्ष, बीज तकनीकी संभाग एवं वर्तमान में परियोजना प्रभारी पी.सी.एफ.सी., भा.कृ.अनु.प. भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी के दल ने केंद्र पर भ्रमण कर संस्थान की तकनीक के प्रसारित करने पर प्रसन्नता जाहिर की.

उन्होंने अधिक कुशलता के लिए केन्द्र के वैज्ञानिकों को मार्गदर्शन भी दिया, ताकि चारा तकनीक का अधिक से अधिक प्रसार कृषकों/पशुपालकों तक हो सके. किसान रूट स्लिप कृषि विज्ञान केन्द्र, शिवपुरी या आईजीएफआरआई झांसी से प्राप्त कर सकते हैं. बाजरा नेपियर संकर घास के साथ मौसमी हरे चारे लगाकर पशुपालक बंधु डेयरी व्यवसाय को और लाभकारी बना सकते हैं और व्यय को भी कम करते हुए पौष्टिक हरे चारे का साल भर एक ही खेत से निरंतर उत्पादन होता रहता है.

Tags: Latest hindi news, Mp news, Shivpuri News

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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