
गुलशन सिंह/ बक्सर. जिले के डुमरांव अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत अंग्रेजों द्वारा स्थापित किया गया टुडीगंज स्टेशन आज भी गुलामी की गवाही दे रहा है. पुराना स्टेशन होने के बावजूद यहां यात्री सुविधाओं के नाम पर कुछ नही है. इस रेलवे स्टेशन पर न तो शौचालय है और न ही पेयजल की व्यवस्था है. साथ हीं शेड के अभाव में यात्री पेड़ के छांव में बैठते हैं. हालांकि टुड़ीगंज स्टेशन पर यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं के लिए रेलयात्री कल्याण समिति के द्वारा कई बार आवाज उठा चुका है लेकिन व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ.
इस स्टेशन के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए रेलयात्री कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर स्थित इस छोटे से रेलवे स्टेशन का निमार्ण सन 1860-62 में ट्विनिंग साहब नामक एक अंग्रेज अफसर ने कराया था. तब वह कृष्णाब्रम्ह में रह क्षेत्रिय किसानों से जबर्दस्ती नील की खेती करवाता था. इसका मकसद था कि इस इलाके में उपजाऊ मिट्टी होने के चलते यहां नील की खेती वृहत पैमाने पर की जाती थी. जिसे उस जमाने में अंग्रेजों द्वारा टुड़ीगंज रेलवे स्टेशन से ट्रेन के माध्यम से कोलकाता भेजा जाता था. वहां से समुद्र के रास्ते दुनिया के अन्य देशों में निर्यात किया जाता था.
अंग्रेजी में आज भी स्टेशन का नाम है ट्वीनिंगगंज
डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि उस वक्त स्टेशन का निर्माण सिर्फ व्यवसायिक गतिविधियों के लिए कराया गया था. बाद में यातायात व्यवस्था के लिए चालू कर दिया गया. अंग्रेजी में आज भी ट्वीनिंगगंज ही लिखा जाता है.1947 के बाद अंग्रेज यहां से चले गए उसके बाद कई जगहों तथा ऐतिहासिक चीजों के नामकरण बदले लेकिन ताज्जुब की बात है कि आज भी टुड़ीगंज रेलवे स्टेशन का नाम एक अंग्रेज के नाम ही रह गया है.
महापुरुषों के नाम पर हो स्टेशन का नाम
डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि रेलयात्री कल्याण समिति ने इस स्टेशन का नाम बदलने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्ञापन देकर मांग की है. वहीं अब नए सिरे से इस मुद्दे को उठाया जाएगा ताकि अंग्रेजों की गुलामी के प्रतीक के रूप में लग रहे टुड़ीगंज का नाम बदलकर सरदार हरिहर सिंह, बाबा भुवरनाथ अथवा अन्य महापुरुषों के नाम पर किया जाए. वही रेलयात्री कल्याण समिति के सदस्य उमेश प्रसाद ने कहा कि जिस प्रकार से मुगलसराय जंक्शन का नाम बदल कर पंडित दीनदयाल किया गया है. इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया, ठीक उसी तरह टुड़ीगंज स्टेशन का भी नाम बदल देना चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : May 28, 2023, 21:18 IST









