
सुमित भारद्वाज/पानीपत: शहर में एक ऐसा हिंदू परिवार है जो धर्म, जाति के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों को सद्भावना का पाठ पढ़ा रहा है. यह हिंदू परिवार दशकों से इस्लाम धर्म की सबसे पवित्र किताब कुरान की हिफाजत कर रहा है. इस परिवार के पास जो कुरान है, वह खास भी है. परिवार का दावा है कि यह दुनिया की सबसे छोटी कुरान है.
राजकुमार सहगल के पास एक ऐसी नायाब कुरान है, जो महज 1 इंच लंबी और 3 ग्राम से भी कम वजनी है. सर्राफा व्यापारी राजकुमार बताते हैं कि सन 1982 से वह इस कुरान की हिफाजत कर रहे हैं. 1982 में जब वह 15 साल के थे, तब अरब देशों से दो शेख कलंदर पीर दरगाह पर आए थे. उस दौरान दोनों उनकी दुकान पर एक ताबीज बनवाने पहुंचे थे.
छुट्टी का दिन होने के कारण उस दिन सभी बाजार बंद थे और केवल उन्हीं की दुकान खुली थी. शेखों ने उनसे ताबीज बनाने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया, लेकिन दोनों काफी मिन्नतें करने लगे, जिसके बाद राजकुमार सहगल ने अपने हाथों से 4 घंटे के अंदर ताबीज तैयार कर दिया.
मेहनत से खुश होकर दी कुरान
सर्राफा व्यापारी राजकुमार की मेहनत देख शेख काफी खुश हुए. दोनों शेख ने जब ताबीज की रकम राजुकमार को देनी चाही तो उन्होंने मना कर दिया, जिसके बाद उन शेखों के पास मौजूद दो छोटी कुरान में से एक कुरान उन्होंने राजकुमार को दी और बताया कि यह दुनिया की नायाब 2 कुरान में से एक है.
572 पन्ने की कुरान
राजकुमार ने बताया कि इस कुरान की खासियत है कि यह 2.8 मिलीग्राम यानी 3 ग्राम से भी कम वजन की है. इसकी चौड़ाई आधे इंच से भी कम है और इसकी लंबाई 1 इंच है. इस कुरान में 572 पन्ने हैं. सबसे बड़ी बात तो यह है कि इतने छोटे पन्ने होने के बावजूद इसे बिना किसी माइक्रोस्कोप या लेंस के भी आसानी से पढ़ा जा सकता है.
बुरे दौर में भी नहीं बेची नायाब किताब
राजकुमार की पत्नी सुषमा बताती हैं कि उनकी शादी को 35 साल हो चुके हैं. शादी के बाद से ही वह इस कुरान की देखभाल कर रही हैं. सुषमा बताती हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब उनका परिवार बहुत बुरे दौर से गुजरा, उस दौरान कई लोगों ने कुरान को खरीदने के लिए लाखों रुपये की पेशकश की, लेकिन उन्होंने इसे किसी को भी नहीं दिया.
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FIRST PUBLISHED : May 28, 2023, 17:33 IST









