
हाइलाइट्स
वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत भी एक-एक बार 11 तारीख को मिला है मुख्यमंत्री का ताज
सिविल लाइंस में बंगले से अनशन तक और पदयात्रा से पुण्यतिथि तक ये है 11 का कनेक्शन
एच.मलिक
जयपुर/दौसा. कई लोगों के लिए कुछ अंक इतने सौभाग्य-सूचक होते हैं कि वो अपना हर काम उस खास दिन पर ही करते हैं. आजकल सचिन पायलट (Sachin Pilot) के साथ भी 11 अंक भी सुर्खियों में है. हालांकि, 11 नंबर से सचिन पायलट का कोई कनेक्शन या संयोग है, यह तो फिलहाल रहस्य ही है, लेकिन इस साल उनके कई रणनीतिक कदम 11 के अंक के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं. अगले माह 11 जून भी खासी चर्चा में रहने वाली है. राजस्थान की राजनीति में अभी संख्याबल सीएम अशोक गहलोत के पक्ष में हैं, तो पायलट अपने ‘लकी नंबर’ के सहारे रणनीति बना रहे हैं.
सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट की राजनीतिक जंग अब क्लाइमैक्स की ओर बढ़ रही है. जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे इसका रोमांच बढ़ रहा है. पायलट हर माह 11 तारीख को बड़े राजनीतिक कदम उठा रहे हैं. आइये सचिन पायलट के साथ 11 के अंक का कनेक्शन देखते हैं…
आपके शहर से (जयपुर)
11 नंबर बंगला सिविल लाइंस में आवंटित
सचिन से 11 का कनेक्शन हो या न हो, लेकिन यह तो सच ही है कि 11 नंबर को अंक ज्योतिष के हिसाब से भी शुभ माना जाता है. आजकल पायलट के साथ बार-बार कनेक्शन के चलते 11 नंबर भी सुर्खियों में है. पहले-पहल तो यह जान लें कि पायलट सिविल लाइंस में जिस बंगले में रहते हैं, वो बंगला नंबर 11 है. यह बंगला उनको डिप्पी सीएम बनने के बाद मिला था. बाद में सियासी जंग में वे डिप्टी सीएम तो नहीं रहे, लेकिन अब सीएम बनने की जंग पूरी शिद्दत के जारी है.
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11 मार्च: वीरांगनाओं का समर्थन, सरकार को घेरा
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पुलवामा शहीदों की तीन वीरांगनाओं के धरने-प्रदर्शन पर एक बार फिर से अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया. पायलट ने सेना पर राजनीति को गलत बताते हुए कहा कि वीरांगनाओं की मांगों को सुनकर शांति से संतोषजनक जवाब देने की कोशिश करनी चाहिए थी. पायलट ने कहा कि सरकार के लिए एक-दो नौकरी बड़ा मसला नहीं है. नियमों में संशोधन पहले भी हुए हैं आगे भी हो सकते हैं. सैनिक हमारे गौरव हैं औह हमें सेना पर इतना फख्र है कि बयां नहीं किया जा सकता. पायलट ने कहा कि वीरांगनाओं के लिए जो काम हम कर सकते हैं, वो तत्काल करने चाहिए. पायलट के बयानों से घिरे सीएम गहलोत ने उसी दिन वीरांगनाओं से की मुलाकात की.
11 अप्रैल: सरकार के खिलाफ अनशन का शंखनाद
प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के मना करने के बाद भी सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन का शंखनाद किया. पार्टी विरोधी होने के आरोपों के बीच पायलट ने कहा- विपक्ष में रहते हुए हमने पिछली वसुंधरा सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ आंदोलन किया. चार साढ़े चार साल से कार्रवाई की उम्मीद थी. मैंने सीएम को दो बार पत्र लिखा, फिर भी कार्रवाई नहीं हुई. हमने बीजेपी के करप्शन को हर राज्य में उजागर किया है. पायलट ने तब ही कहा था- कर्नाटक में बीजेपी की 40 प्रतिशत की सरकार है. जनता उन्हें चुनाव में सत्ता से बाहर कर देगी.
11 मई: करप्शन के खिलाफ जन संघर्ष पदयात्रा
अनशन के ठीक एक माह बाद सचिन पायलट ने भ्रष्टाचार और अपनी सरकार के लापरवाह सिस्टम के चलते पेपर लीक होने के खिलाफ पदयात्रा की. पांच दिनी पदयात्रा अजमेर से शुरू होकर 16 मई को जयपुर पहुंची. पायलट ने कहा, ‘‘अपनी आवाज उठाने के लिए, आपकी आवाज सुनने के लिए, जनता की आवाज बनने के लिए हमने यह यात्रा निकाली है. जन संघर्ष यात्रा भ्रष्टाचार के विरोध में है.’’ पदयात्रा की समाप्ति पर पायलट ने खुली जंग का ऐलान करते हुए कहा कि तीन मांगों को सरकार ने 15 दिन में पूरा नहीं किया तो पूरे प्रदेश में इससे बड़ा आंदोलन किया जाएगा. अब हम किसी भी सूरत में पीछे हटने वाले नहीं हैं.
11 जून: पिता की पुण्यतिथि पर नई पार्टी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सचिन पूरी रणनीति के तहत सधे हुए कदम उठा रहे हैं. सरकार को पंद्रह दिन का समय इसलिए दिया है, ताकि इसके बाद 11 जून को पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर होने वाली विशाल श्रद्धांजलि सभा में बड़ी घोषणा की जा सके. वैसे भी सचिन पायलट और कांग्रेस के बीच अब दूरियां बढ़ती जा रही हैं. बीजेपी नेताओं के ऑफर के बावजूद पायलट उसमें शामिल होने का मन नहीं बना पा रहे हैं. यही वजह है कि पायलट नई राजनीतिक राह पकड़ सकते हैं. इसका औपचारिक 11 जून को हो सकता है, लेकिन इसके पहले उनकी प्रशांत किशोर से जुगलबंदी बताती है कि उन्होंने युवाओं में पैठ बनाने की रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है. पीके की कंपनी आईपैक 18 से 40 साल तक के युवाओं को राजनीति से जोड़ने की मुहिम चला रही है.
13वीं और 14वीं विधानसभा भी 11 से शुरू
हालांकि इनका सचिन पायलट से सीधे कनेक्शन नहीं है, लेकिन पायलट का लक्ष्य विधानसभा में इच्छित विधायकों को जिताकर सीएम बनना ही है. इस संयोग के बारे में आपको बता दें कि अशोक गहलोत दूसरी बार 11 दिसंबर 2008 को ही मुख्यमंत्री बने थे. इसी प्रकार वसुंधरा राजे ने भी 11 दिसंबर 2013 को मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाली 11 दिसंबर को सीएम की कुर्सी पर कौन सुशोभित होता है?
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Tags: Assembly election, Congress politics, Jaipur news, Sachin pilot
FIRST PUBLISHED : May 17, 2023, 06:30 IST









