बाल खाने (Trichophagia) की आदत ने पहुचांया मौत के मुंह तक, कठिन औपरेशन से बची युवती की जान

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बाल खाने (Trichophagia) की आदत ने पहुचांया मौत के मुंह तक, कठिन औपरेशन से बची युवती की जान

मानसिक बिमारी (PICA) बनी जानलेवा, पेट से निकला आधा किलो बालों का गुच्छा (Trichobezoar)

प्रयागराज, कौशांबी, जुलाई 2025

कौशांबी जिले की अंडवा पश्चिम शरीरा सरसावा निवासी 21 वर्षीय मंजू बचपन से ही मानसिक तनाव और व्यवहारगत विकृति से जूझ रही थी। मानसिक असंतुलन के कारण उसे बाल खाने (Trichophagia) की आदत लग गई थी। वह अक्सर अपनी मां और बहनों के बाल नोचकर खा जाती थी, जिससे धीरे-धीरे उसके पेट में बालों का एक बड़ा गुच्छा (Trichobezoar) बन गया।

कुछ समय बाद मंजू को लगातार पेट में तेज़ दर्द, उल्टी, भूख न लगना और वजन तेजी से गिरने जैसी गंभीर समस्याएं होने लगीं। परिवारजन उसे कई अस्पतालों में ले गए, कई अल्ट्रासाउंड जांचें कराईं, पर बीमारी की सही पहचान नहीं हो सकी।

कोई डॉक्टर ऑपरेशन को तैयार नहीं था, पर नारायण स्वरूप हॉस्पिटल बना उम्मीद की किरण।
निराशा की स्थिति में मंजू को नारायण स्वरूप हॉस्पिटल, प्रयागराज लाया गया, जहां वरिष्ठ सर्जन डॉ. राजीव सिंह, डॉ. विशाल केवलानी, डॉ. योगेंद्र, और डॉ. राज मौर्य की विशेषज्ञ टीम ने गंभीर स्थिति को समझते हुए तत्परता से इलाज की रूपरेखा बनाई। एडवांस तकनीक और अनुभव के आधार पर सफल ऑपरेशन किया गया, और पेट से बालों की बड़ी गांठ निकाली गई। यह बालों का गुच्छा लगभग आधा किलो एवं 1.5 फिट लम्बा और 10 सेंटीमीटर मोटा है इसके औपरेशन में खाने की थैली (Stomach)को ओपन करके सावधानी पूर्वक पुरे लाखों बाल के गुच्छों को जो कि आपस में चिपक करके एक आधा किलो का ट्यूमर बना लिए थे जिसे (Trichobezoar) कहा जाता है। पूरा गुच्छा निकालने के उपरांत आंत की धुलाई और सफाई करके खाने की थैली को रिपेयर कर दिया गया, औपरेशन करने में लगभग 2 घंटे का समय लगा, यह एक जटिल औपरेशन होता है, परन्तु मरीज अब बिलकुल पूर्णता स्वस्थ है और नार्मल भोजन कर रहा है और अब उसके मानसिक रोग की बीमारी ठीक हो गयी है

आज मंजू सुरक्षित है, सामान्य भोजन कर पा रही है, और मानसिक परामर्श से भी गुज़र रही है।
यह मामला एक गंभीर चेतावनी है:
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें।
बच्चों के व्यवहार में असामान्यता दिखे तो उसे अनदेखा न करें।
मानसिक विकृति समय पर पहचान कर उपचार कराना अत्यंत आवश्यक है।
शारीरिक लक्षणों के पीछे मानसिक कारण भी हो सकते हैं।
नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राजीव सिंह ने बताया, “यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था। पर समय रहते ऑपरेशन कर जान बचा ली गई। यह घटना बताती है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को साथ लेकर चलना बहुत ज़रूरी है।”

Up Head Line
Author: Up Head Line

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