कौशाम्बी
*”संगम की पुण्यधारा से पहले ‘सेवा का संगम’: थानेदार का बसंत पंचमी पर नया अध्याय”*
*कौशाम्बी –:* बसंत पंचमी के दिन संगम की पवित्रता में डुबकी लगाने जा रहे श्रद्धालुओं ने एक ऐसा दृश्य देखा, जो शायद पर्व के इतिहास में सबसे अलग था। संदीपनघाट थानाध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने परंपरागत वर्दीधारी छवि से अलग हटकर समाजसेवा का ऐसा चेहरा प्रस्तुत किया, जिसने मानवता को नए आयाम दिए।
इस बार संगम की राह में सिर्फ श्रद्धा का कारवां नहीं रुका, बल्कि सेवा का सिलसिला भी शुरू हुआ। हाईवे पर संगम स्नान के लिए बढ़ते कदम थानेदार विजेंद्र सिंह ने रोके नहीं, बल्कि उस राह को मोड़ दिया, जहां भूख से जूझते गरीबों की उम्मीदें दम तोड़ रही थीं।

*“सेवा से बड़ा पुण्य संगम का स्नान भी नहीं”*
संदीपनघाट थाना के थानेदार विजेंद्र सिंह ने अपनी टीम के साथ झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में जाकर न केवल भोजन बांटा, बल्कि पर्व की खुशियों को उन तक पहुंचाया, जिनके लिए हर दिन भूख और संघर्ष का नाम है। सब्जी, पूड़ी और मिठाई के साथ वे एक ऐसा संदेश लेकर पहुंचे, जिसने त्योहार को सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मानवता का पर्व बना दिया।
*गरीबों के लिए फरिश्ता बने विजेंद्र सिंह*
गरीब बस्तियों में रहने वाली शीला देवी ने नम आंखों से कहा, “हमने बसंत पंचमी के दिन कभी ऐसा भोजन नहीं खाया। आज पहली बार लगा कि हमारे लिए भी त्योहार है।” वहीं, बच्चों की चहक और बुजुर्गों की दुआएं थानेदार की इस पहल को अमर कर गईं।

*“जहां भूख मिटे, वहीं पर्व का असली संगम है”*
थानाध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा, “कानून व्यवस्था संभालना हमारी ड्यूटी है, लेकिन समाज की सेवा हमारा धर्म। अगर एक भूखा पेट सोए, तो पर्व अधूरा है।”
*समाज के लिए संदेश*
जब वर्दीधारी हाथ भोजन बांटते हैं, जब पुलिस सड़क पर सुरक्षा के साथ सेवा की लौ जलाती है, तब पर्व की असली आत्मा जाग उठती है। थानेदार विजेंद्र सिंह ने बसंत पंचमी को सिर्फ तिथि नहीं, बल्कि इंसानियत का महापर्व बना दिया।






