कोटेदार ने शनिवार को डीएम से शिकायत कर दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करने की लगाई गुहार
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SHABBAR ALI/ MO:7007720588
तहसील चायल इलाके में संचालित ज्यादातर राशन की दुकानें खड़ाऊं राज के सहारे संचालित है। यानि नाम किसी का और दुकान कोई और चला रहा। इसे मजबूरी समझा जाए या कार्रवाई से बचने का नायाब तरीका, हो कुछ भी लेकिन खाद्यान्न माफिया खुद को बचाने के लिए अपनों के नाम राशन की दुकानें करा लेते हैं। ताजा मामला सरायअकिल के रसूलपुर टप्पा गांव का शनिवार को सामने आया है।
राशन का उठान के लिए कोटेदारों को आवंटित खाद्यान्न का मूल्य बैंक के माध्यम से जमा करना होता है। कई ऐसे कोटेदार हैं जिनकी आर्थिक स्थिति उतनी सही नहीं है कि वह कोटे के लिए आवंटित खाद्यान्न की धनराशि अपने पास से जमा कर सकें। ऐसे में वह किसी बलवान व धनवान से सहायता लेते हैं। बस यहीं से खेल शुरू हो जाता है। दूसरी तरफ कई कोटेदार ऐसे भी हैं जिनके सारे कागजी कोरम उनके आका पूरा करते हैं और धनराशि भी वही जमा करते हैं। असली कोटेदारों को केवल अंगूठा लगाना व हस्ताक्षर करना होता है। वैसे कोई भी कोटेदार अपने आकाओं के सामने सिर उठाने का साहस नहीं करता और न ही अधिकारियों व माननीयों के सामने जुबान खोलता है। सरायअकिल के रसूलपुर टप्पा गांव की कोटेदार शांति देवी ने बताया कि वह विधवा है। वह महिला एकता स्वंय सहायता समूह की कोषाध्यक्ष है। एक साल पहले उसे कोटा आवंटित किया गया है। आरोप है कि आज तक बिना उसके हस्ताक्षर के ही गांव के दो दबंग जबरन विभाग में सेटिंग कर फर्जी खात नम्बर लगाकर राशन का उठान कर उसे बेचते हैं। कोटेदार के पूछने पर उसे धमकी देते हैं। 30 सितम्बर को कोटेदार ने डीएम को शिकायती पत्र के साथ अपना इस्तीफा सौंप दिया। शिकायत की जांच होने पर 22 कुंतल राशन की कमी निकली। शनिवार को कोटेदार ने मामले की शिकायत सम्पूर्ण समाधान दिवस में डीएम से करते हुए दबंगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राशन की कमी के वसूली करने की गुहार लगाई। डीएम ने एसडीएम योगेश कुमार गौड को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।






