कौशाम्बी के दारानगर के 245 वें रामलीला में गुरु विश्वामित्र ने प्रभु श्री राम एवम लक्ष्मण के साथ किया गंगा पूजन
दारानगर के ऐतिहासिक रामलीला में टेढ़ी मोड़ स्थित श्री रामलीला परिसर के तालाब पर गंगा पूजन का कार्यक्रम हुआ।गुरु विश्वामित्र के साथ श्री राम और लक्ष्मण जब वन में राक्षसों से लड़ने के लिए जाते हैं, तो रास्ते में उन्हें गंगा नदी मिलती है। तब गुरु विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को गंगा नदी के बारे में बताया कि कैसे पृथ्वी पर उनका अवतरण हुआ था और उनके आने से पृथ्वी पर रहने वालों का उद्धार हुआ था। इसके बाद, गुरु विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण गंगा घाट पर पहुंचते हैं और वहां मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं, और जनकपुर के लिए रवाना हो जाते हैं।रामायण के मुताबिक, गुरु विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को कई तरह की शिक्षाएं दी थीं।जिसमें धनुर्विद्या, बला और अतिबला विद्या, देवस्त्रों या दिव्य शस्त्रों का ज्ञान, उन्नत धर्म में प्रशिक्षण।इन विद्याओं की वजह से भगवान राम और लक्ष्मण को भूख-प्यास, थकान, और बीमारियों से मुक्ति मिल गई थी।

अतिबला विद्या की वजह से दोनों में इतनी ताकत आ गई थी कि वे लंबे समय तक बिना थके किसी से भी लड़ सकते थे।श्री राम लीला कमेटी के पुरोहित पंडित चंद्रिका प्रसाद मिश्र ने बताया कि गंगा जी को त्रिपथगा, जाह्नवी, और भागीरथी जैसे कई नामों से जाना जाता है।गंगा जी को जह्नु ऋषि ने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया था। गंगा जी के जल के स्पर्श से भस्मीभूत हुए सगर के पुत्र निष्पाप होकर स्वर्ग गए थे।ब्रह्मा जी ने भगीरथ को वरदान दिया था कि उनके पुण्य के प्रताप से प्राप्त गंगाजल से स्नान करने वाला हर व्यक्ति दुखों से मुक्त होकर स्वर्ग जाएगा।

इस दौरान कार्यक्रम में मूल प्रकाश त्रिपाठी, महामंत्री योगेंद्र मिश्र, अध्यक्ष जय मणि तिवारी, चक्रधर पांडेय ,अतुल पाठक, मनोज पटेल ,लवलेश कुमार ,ग्राम प्रधान थुलगुला,एडवोकेट शुभेंद्र श्रीवास्तव,प्रभाकर शुक्ला,रामरूप,संजय पाठक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।इसके बाद टेढ़ीमोड़,थुलगुला ,एवं कमंगलपुर में घर-घर भगवान श्री राम लक्ष्मण एवं गुरु विश्वामित्र की पूजा हुई लोगों ने बड़े ही भाव से भगवान की पूजा किया। कमेटी के महामंत्री योगेंद्र मिश्र ने बताया कि कल फुलवारी लीला का कार्यक्रम दारानगर के म्योहरा में संपन्न होगा।






