जौनपुर
*पुलिस वर्दी सिलाई, आजमगढ़ से कार्बाइन और पिस्टल आया,*
*फिल्मी स्टाइल में घर जाकर पुलिस के भेष में भाड़े के बदमाशों ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया,*
*फिर गोलियों से भूल डाला…* मुलायम के गुरु बहुचर्चित ज्योतिषी रमेश तिवारी हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी….
*एक इंस्पेक्टर ने कैसे 2 अज्ञात हत्यारों से 14 आरोपियों की पहचान की…. ऐसी चार्जशीट जिससे कोई बच नही पाया..*
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गुरु रहे ज्योतिषी रमेश तिवारी की हत्या के मामले में मंगलवार को जौनपुर कोर्ट ने फैसला सुनाया. कोर्ट ने 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. सरपतहा थाना क्षेत्र के ऊंचगांव में रमेश तिवारी की करीब 12 साल पहले गोली मारकर की हत्या कर दी गई थी. मंगलवार को हत्या के इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ रूपाली सक्सेना ने शूटर विपुल समेत 12 आरोपियों को दोषी करार दिया. साथ ही कोर्ट ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस केस की इनसाइड स्टोरी जानकर आप चौक जाएंगे आखिर कैसे चुनावी हार और वर्चस्व की लड़ाई में रची गयी थी रमेश तिवारी के हत्याकांड की साजिश….
*चुनावी रंजिश और वर्चश्व बनी हत्या की वजह :*
सरपतहां थाना क्षेत्र के ऊँचगॉव निवासी बहुचर्चित ज्योतिषी रमेश तिवारी हत्याकांड की प्रमुख वजह चुनावी रंजिश और वर्चश्व की लड़ाई थी। दरअसल, मृतक के पिता राजेन्द्र प्रसाद तिवारी और हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता धीरेंद्र सिंह की पत्नी अनीता सिंह ने 2010 में ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा था। प्रधान पद के लिए की गई दावेदारी में राजेंद्र प्रसाद तिवारी को 37 मतों से जीत मिली थी। इसके अलावा ऊँचगॉव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय निर्माण के लिए प्रतापगढ़ में टेंडर हुआ था, जिसमे टेंडर राजेन्द्र प्रसाद तिवारी को मिला था। इससे मुख्य साजिशकर्ता धीरेंद्र सिंह और उनके परिवार के लोग काफ़ी परेशान थे। रमेश तिवारी व उनके परिवार के वर्चश्व के आगे गॉव में खुद को पराजित महसूस कर रहे थे। इस टीस को हमेशा के लिए खत्म करने और गॉव में अपनी सत्ता कायम रखने के लिए रमेश तिवारी की हत्या की योजना बना डाली थी।

*गोरखपुर जेल से शार्प शूटर को हायर किया गया :*
सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गुरू ज्योतिषी रमेश तिवारी को ठिकाने लगाने के लिए साजिशकर्ता धीरेंद्र सिंह ने गोरखपुर जेल में बंद शार्प शूटर शेरू सिंह को हायर किया था। जानकारी के मुताबिक शेरू के पेशी से लेकर जेल से बाहर निकलने तक का खर्च धीरेंद्र सिंह ने उठाया था। भाड़े के शार्प शूटर शेरू सिंह ने अपने साथी विपुल सिंह के साथ मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था।
*अत्याधुनिक असलहे, आजमगढ़ से उपलब्ध कराये गए*
ज्योतिषी रमेश तिवारी की फिल्मी स्टाइल में हत्या करने के लिए कार्बाइन और 9MM की ऑटोमैटिक पिस्टल जैसे अत्याधुनिक हथियार आजमगढ़ के शार्प शूटर अमरजीत यादव ने उपलब्ध कराए थे। अमरजीत पर 67 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
*यहां सिलवाई गयी थी पुलिस की वर्दी :*
पुलिस को चकमा देने के लिए हत्याकांड को बेखौफ तरीके से अंजाम देने का प्लान बना था। शेरू और विपुल भाड़े के इन दोनों शार्प शूटरों ने हत्याकांड की जिम्मेदारी ली थी। इसके लिए बाकायदा उनके लिए पुलिस की वर्दी सिलवाई गयी थी। यह वर्दी जौनपुर के कोतवाली चौराहे के पास स्थिति मेट्रो मॉर्डन टेलर्स के यहां से सिलवाई गयी थी। इतना ही नही इस हत्याकांड में प्रयुक्त मोबाइल फोन ओलंदगंज स्थित बालाजी मोबाइल शॉप से खरीदे गए थे।
*निहारिका बजाज से खरीदी गई थी डिस्कवर बाइक:*
पुलिस की वर्दी में दोनों शार्प शूटर्स जिस बाइक से अंजाम देने गए थे। वह जौनपुर के निहारिका बजाज शोरूम से चेक द्वारा खरीदी गई थी। बजाज डिस्कवर बाइक से वर्दीधारी बदमाशों ने फिल्मी स्टाइल में जाकर रमेश तिवारी को गोलियों से भून डाला था।
हत्या के बाद दोनों शूटर अम्बेडकर चले गए थे। जहां शेरू ने अपनी मौसी के यहां हत्या में प्रयुक्त पुलिस की वर्दी को छुपाकर कपड़े बदले थे। असलहों को रखा था। जो बाद में पुलिस ने सर्विलांस की मदद से बरामद किया था। हत्या में प्रयुक्त 1 पिस्टल जौनपुर के जाफराबाद में हुए शेरू के एनकाउंटर में ने बरामद किया था। जबकि 1 पिस्टल आरोपी विपुल सिंह के पास से गोरखपुर से बरामद हुई थी। कार्बाइन को शूटरों ने देवरिया पहुंचा दिया था, रामपुर कारखाना स्थित एक अन्य अपराधी के पास से हत्याकांड में प्रयुक्त कार्बाइन बरामद भी हुई थी।
*15 नवम्बर 2012 को हुई थी हत्या :*
BHU से गोल्डमेडलिस्ट रहे ज्योतिषाचार्य रमेश तिवारी की 15 नवम्बर 2012 को उनके ऊँचगॉव स्थित पैतृक आवास पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की वर्दी में बाइक से पहुँचे अत्याधुनिक असलहों से लैस बदमाशों ने रमेश तिवारी का पैर छूकर आशीर्वाद लेने के बाद उनकी गोलियो से भून डाला था। गोलियों की आवाज सुनकर परिवार में भगदड़ मच गयी। बचाव में पहुंचे उनके छोटे भाई राजेश चंद्र तिवारी के जबड़े में गोलियाँ लगी थी जिससे वे बुरी तरह घायल हो गए थे। बदमाशों ने उनके छोटे भाई को गोली मारने के बाद पुनः जाकर रमेश तिवारी पर गोलियां बरसाकर इस बात की पुष्टि कर ली थी कि उनकी मौत हो चुकी है। इसके बाद बाइक से फरार हो गए थे।
आनन-फानन में उन्हें सुल्तानपुर के निजी अस्पताल ले जाया गया था जहां चिकित्सकों ने उन्हें।मृत घोषित कर दिया था। जबकि गोलीकांड में घायल उनके छोटे भाई राजेश की इलाज से जान बच गयी।
*2 अज्ञात के खिलाफ दर्ज हुआ था केस :*
बहुचर्चित ज्योतिषी रमेश तिवारी की हत्या के बाद हड़कंप मच गया था। इस हत्याकांड से सूबे के सियासतदान तक हिल गए थे। दरअसल रमेश तिवारी अपने ज्योतिषी कला के जरिये सपा समेत सभी दलों के नेताओ ब बड़े अधिकारियों के करीबी बन गए थे।
*एसपी के चार्ज लेने के 2 दिन बाद हुई थी हत्या:*
जौनपुर की तत्कालीन एसपी मंजिल सैनी के चार्ज लेने के ठीक 2 दिन बाद हुए इस हत्याकांड से पुलिस के लिए भी एक बड़ा सिरदर्द बन गया था। घटना के बाद तत्कालीन एडीजी ला एंड आर्डर, प्रमुख सचिव, आईजी, डीआईजी समेत करीब दो दर्जन से अधिक जिलों के एसपी-एसएसपी घटनास्थल पर पहुचे थे।
*इंस्पेक्टर प्रशांत श्रीवास्तव को मिली थी हत्याकांड की जांच:*
अज्ञात बदमाशों की पहचान और घटना का सफल अनावरण करना जौनपुर पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। इस महत्त्वपूर्ण केस की जिम्मेदारी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने जिले के तेज तर्रार व चंदवक थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष प्रशांत श्रीवास्तव को सौंपी थी। प्रशांत के लिए भी यह बड़ी चुनौती थी। विवेचक प्रशांत ने बताया कि इस केस का अनावरण तत्कालीन एसपी मंजिल सैनी के निर्देशन में सम्भव हुआ था। इसके लिए उनके साथ खुद मंजिल सैनी इस केस पर नजर रखते हुए रात-रात जगकर सर्विलांस और मुखबिरों की मदद से पुलिस को मिले प्रत्येक बिंदु को देखती और उचित दिशा निर्देशन देती थी। सर्विलांस की मदद से कई लोगों तक पुलिस पहुंचने में कामयाब रही उंसके बाद इस हत्याकांड के साजिश की कड़ी दर कड़ी खुलती गयी। जिसके इस केस से जुड़े 14 आरोपियों की पहचान हो सकी।
*1 साल के अंदर दाखिल हुई थी चार्जशीट :*
बहुचर्चित ज्योतिषी हत्याकांड के विवेचक रहे प्रशांत श्रीवास्तव ने 1 साल के अंदर ही इस केस की चार्ज शीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। कुल 1 हज़ार से अधिक पेज की चार्जशीट में विवेचक ने हत्याकांड की पूरी कहानी को खोलकर रख दिया था। जिससे इस केस से जुड़ा कोई भी आरोपी बच नही सका।
*14 लोग थे आरोपी :*
पुलिस की छानबीन में मुखबिर की सूचना व आरोपितों के मोबाइल काल डिटेल के आधार पर शूटर विपुल सिंह, हत्या के मुख्य साजिशकर्ता धीरेंद्र सिंह, झारखंडे सिंह, सूबेदार सिंह, कौशल किशोर सिंह, विजय बहादुर सिंह, वीरेंद्र बहादुर सिंह, लाल शंकर उपाध्याय ,अमित उर्फ पंडित, अरविंद, शैलेंद्र, तन्नू सिंह, अमरजीत सिंह का नाम प्रकाश में आया था।
*एनकाउंटर में मारा गया था शार्प शूटर :*
भाड़े का शार्प शूटर शेर बहादुर सिंह जाफराबाद क्षेत्र में हुए पुलिस एनकाउंटर में मार दिया गया था। जिसके लिए तत्कालीन एसपी मंजिल सैनी ने विवेचक प्रशांत श्रीवास्तव को प्रशस्ति पत्र देकर समानित किया था। इसके अलावा इस केस से जुड़े आरोपित झारखंडे सिंह की मृत्यु हो चुकी है। शेष 12 आरोपियों को कोर्ट ने दोषी पाते हुए मंगलवार को उम्रकैद व 30-30 हज़ार रु अर्थदंड की सजा सुनाई।
*13 आरोपियों के खिलाफ दाख़िल हुआ था आरोप पत्र*
13 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र पुलिस ने प्रस्तुत किया। सभी गिरफ्तार हुए थे। एक का एनकाउंटर और एक आरोपी की मौत होने से इस केस में कुछ 12 आरोपी बचे थे। सभी की जमानत हुई। आरोपित धीरेंद्र की जमानत सुप्रीम कोर्ट से हुई। मंगलवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सभी आरोपितों को दोषी पाते हुए सजा सुनाया।
*सभी को उम्रकैद की सजा:*
कोर्ट ने दोषी पाते हुए हत्याकांड में बचे शेष सभी 12 आरोपियों को उम्रकैद और 30-30 हज़ार रु अर्थदंड की सजा सुनाई है।
*12 साल बाद न्याय मिला :*
करीब 12 वर्ष बाद न्याय मिलने के बाद मुकदमा वादी उमेश चंद्र तिवारी ने कहा कि उन्हें कोर्ट और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। न्याय मिलने में तत्कालीन विवेचक प्रशांत श्रीवास्तव समेत पुलिस और न्यायपालिका का अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि आज उन्हें भाई को सच्ची श्रद्धांजलि मिली।






