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सरायअकिल के मुस्तफाबाद मुंजप्ता गांव में जुलजनाह, ताबूत और अलम का जुलूस निकाला गया। इसके पहले मजलिस में मौलाना ने कर्बला के मसायब बयान किए तो अजादार अपनी आंखों से अश्क नहीं रोक सके। वह जारो कतार रोने लगे। उसके बाद बाहर से आई अंजुमनों ने नौहा ख्वानी व सीनाजनी की।

मुस्तफाबाद सादात गांव में अजादरों ने करबला में शहीद इमाम हुसैन और उनके 71 जांनशीनों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। मौलाना जनाब गालिब अब्बास जैदी ने मजलिस बयान करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने करबला के मैदान में अपने नाना के दीन को बचाने के लिए कुर्बानी दी थी। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में इंसानियत बची हुई है। कहा कि रसूल व आले रसूल से मोहब्बत का तरीका ये है कि हम उनका कहना मानें, उनके बताए रास्ते पर चलें। मकसद-ए-हुसैन को समझें और उस पर अमल करें। तभी मजलिसों में आना कुबूल होगा। हमें इमाम हुसैन के मकसद को सामने रखकर अजादारी व शब्बेदारी को अंजाम देना चाहिए। इमाम हुसैन ने दुनिया के सबसे बड़े आतंकी यजीद के खिलाफ सच्चाई की आवाज बुलंद की और इंसानियत को मरने से बचाया। उन्होंने इमाम हुसैन की चार साल की बच्ची जनाब ए सकीना की शहादत बयान की तो अजादार दहाड़ें मारकर रो पड़े। मजलिस से पहले जनाब महताब हुसैन और जनाब रफाकत हुसैन ने सोज पढ़ी। पेशख्वानी जनाब अबूतराब मुस्तफाबादी, जनाब शाहिद, जनाब इरम बनारसी और जनाब साजिद मुस्तबादी ने की। इसके बाद अंजुमन कमर ए बनी हाशिम ने जुलूस बरामद किया। जुलूस में अंजुमन जैनुल एबा कदीम रायबरेली, अजाए हुसैन उन्नाव, अब्बासिया दांदूपुर, गुलजार ए अब्बासिया बनारस, हुसैनी जसरा, हैदरी हल्लौर, नक्विया ऊंचाहार, सदका ए जहरा करारी और रौनक ए अजा जलालपुर की अंजुमनों ने पुरदर्द अंदाज में नौहाख्वानी और सीनाजनी की। हरदोई से आए हिन्दू नौहाख्वान छोटेलाल यादव ने अपने मखसूस अंदाज में नौहा पढ़ा। यौम ए गम में चारो तरफ से हाय हुसैन, हाय अब्बास, हाय सकीना की सदा गूंज रही थी। कौशाम्बी ब्लाक के प्रमुख पति शशिभूषण द्विवेदी उर्फ बालम ने भी यौम ए गम शब्बेदारी में शिरकत कर अंजुमनों का हौसला बढ़ाया। अंजुमन कमर ए बनी हाशिम कमेटी के लोगों ने उन्हें शॉल देकर सम्मानित किया






