कौशाम्बी
अंतस्थल की व्यथा सिमट नयनों में भर आती है।
कोलकाता की डाक्टर बिटिया की याद सताती है।
यह सत्य है कि चिकित्सक भगवान का दूसरा रूप होता है, पीड़ित, शोषित और बीमार व्यक्तियों की हर स्तर से जान बचाता है। कोलकाता के आर० जी० मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में दरिंदों ने जिसतरह दरंदगी के साथ महिला चिकित्सक से पहले रेप और फिर नृसंस हत्या किया; और फिर बुरी तरीके से दर्दनाक मौत दिया। इससे पहले भी निर्भया काण्ड, निठारी काण्ड सहित अनगिनत घटनाओं में शासन-प्रशासन, न्यायपालिका-कार्यपालिका की लचर व्यवस्था के क्रम में अपराधी जीता जाता है और शोषित-पीड़ित वर्ग थक हारकर शांत हो जाता है। जो खेद का विषय है।

आज कोलकाता की घटना के असहनीय दर्द के अहसास के साथ कौशांबी मेडिकल प्रोफेशनल एसोसिएशन एवं प्राइवेट मेडिकल संगठन की पहल पर चिकित्सा जगत से सैकड़ो डॉक्टर ने हाथों में बैनर झंडा लेकर हैंड स्लोगन के जरिएप्रशासन से भारत सरकार से मांग किया कि न्याय जल्दी मिले क्योंकि जो न्याय देर से मिलता है वह न्याय न्याय नहीं है कोलकाता बलात्कार घिनौने कार्यों में लिप्त आतताइयों और बलात्कारियों को फाँसी की सजा दिलाने की लिए पुरजोर माँग किया। कोलकाता की डाक्टर बिटिया के लिए श्रद्धांजलि दिया। इस शांति मार्च में डॉ वसीम अहमद डॉक्टर इकरार अहमद डॉ विनायक शुक्ला डॉ गोपाल गुप्ता डॉ राजेश त्रिपाठी डॉ एसके त्रिपाठी डॉ पंकज पांडे डॉक्टर शोएब अहमद हजरेश मणि शंकर माथुर दीपक धुरिया डॉ अरुण शर्मा दिनेश कुमार डॉ राज डॉ राजू डॉक्टर सोहनलाल डॉ स्क पटेल डॉ राजेंद्र मौर्य शाहिद सैकड़ो डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मी पैरामेडिकल स्टाफ शामिल रहे






