कौशांबी। मंझनपुर स्थित समाजवादी पार्टी के दफ्तर मे संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर का 66 वां निर्वाण दिवस पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर सपा के महासचिव व एमएलए इंद्रजीत सरोज ने डॉ अंबेडकर मे चित्र पर पुष्पांजलि कर उन्हें अपने कृतघ्नता व्यक्त की। उन्होने कहा कि डॉ अंबेडकर ने शोषित पिछड़े और दलित समाज को समाज मे बराबरी का दर्जा दिलाया। वह सदैव उन्हे बताए रास्ते पर समाज के शोषित वर्ग की लड़ाई लड़ उन्हे आगे लाने का काम करेगे।
गरीब और दलित वर्ग की स्थिति में सुधार लाने में डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर का अहम योगदान रहा है। उन्होंने समाज से छूआछूत समेत कई प्रथाओं को खत्म करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। बौद्ध धर्म अनुयायियों का मानना है कि उनके बुद्ध गुरु भी डॉ अम्बेडकर की तरह ही सदाचारी थे। डॉ अम्बेडकर अपने कार्यों से निर्वाण प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए उनके पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
सपा महासचिव इंद्रजीत सरोज ने डॉक्टर अम्बेडकर के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा, डॉ भीमराव रामजी अंबेडकर ने कई साल बौद्ध धर्म का अध्ययन किया और 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया। मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार भी बौद्ध धर्म के नियम के अनुसार ही किया गया था। मुंबई के दादर चौपाटी में जिस जगह डॉ अम्बेडकर का अंतिम संस्कार हुआ था, उसे अब चैत्य भूमि के नाम से जाना जाता है। संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की पुण्यतिथि यानी 06 दिसंबर के दिन लोग उनकी प्रतिमा पर फूल-माला चढ़ाते हैं। दीपक व मोमबत्तियां जलाते हैं। इसके बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। बाबासाहेब को श्रद्धांजलि देने के लिए चैत्य भूमि पर भी लोगों की भीड़ जमा होती है। इस दिन बौद्ध भिक्षु समेत कई लोग पवित्र गीत गाते हैं और बाबा साहेब के नारे भी लगाए जाते हैं।सपा एमएलए व महासचिव इंद्रजीत ने बताया, वह लोगों से आवाहन करते है कि बाबा भीमराव के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को भी समाज के उत्थान एवं शोषित लोगो को आगे लाने के लिए काम मे ले आए। इस कार्यक्रम में जिला महासचिव गुलाम हुसैन,परवेज अख्तर,सोनी चौधरी,राइस अहमद, कैलाश केशरवानी, दया शंकर, मान सिंह पटेल,आनन्द मोहन,महताब आलम पटेल,शहनवाज अहमद
सहित तमाम नेता मौजूद रहे।






