
पीयूष पाठक/अलवर. शहर की ब्रह्मचारी कॉलोनी मे भी खाटू के श्याम मंदिर की तर्ज पर श्याम मंदिर स्थापित है. इस मंदिर की कहानी भी बहुत रोचक है. इस मंदिर की इमारत करीब 250 साल पुरानी है. पहले यह मंदिर राधा कृष्ण मंदिर हुआ करता था, लेकिन सन 1991 में इसमें श्री श्याम की प्रतिमा विराजित की गई. जिसके बाद यह मंदिर श्याम मंदिर के नाम से विख्यात होने लगा. यहां भी दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए आते हैं. शहर के इस मंदिर में सीकर के मंदिर की तरह श्रृंगार व आरती होती है. इस मंदिर में भगवान श्याम, शिव परिवार व हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित है.
250 साल पुरानी है इमारत
मंदिर के व्यवस्थापक विजय कुमार शर्मा ने बताया कि यह मंदिर करीब 250 साल से भी पुराना बताया जाता है. पहले यह मंदिर राधा कृष्ण मंदिर के रूप मे जाना जाता था और मंदिर जीर्ण अवस्था में था. सन 1976 मे यहां से राधा कृष्ण की प्रतिमा चोरी हो गई. जिसके बाद करीब 15 साल तक यहां किसी भी भगवान की प्रतिमा स्थापित नहीं हुई. इसके बाद सन 1991 में बहुत ढूंढने के बाद वर्तमान में विराजित प्रतिमा को जयपुर से तैयार कराकर लाया गया. इसके बाद पूरे विधि विधान से यह बाबा की प्राण प्रतिष्ठा की गई. विजय कुमार तब से ही खाटू श्याम के भक्त रहे हैं.
सीकर से लाए थे अखंड ज्योत
आज अलवर का श्याम मंदिर पूरे आकर्षण के साथ लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है. विजय ने बताया कि वे अलवर के कालां कुआं क्षेत्र में रहते हैं, लेकिन 30 साल से मंदिर में आते हैं. इनकी पत्नी नीलूभी मंदिर को अपना पूरा समय देती हैं. सन 1995 से यहां पर सीकर के मंदिर से अखंड जोत लाई गई जो आज भी अखंड है. विजय का कहना है कि मैं मंदिर की सेवा को एक तरह से हॉस्पिटल की सेवा की तरह ही मानता हू. व्यक्ति हॉस्पिटल में आकर संतुष्ट होता है और भक्त भगवान के मंदिर मे आकर संतुष्ट होता है.
मंदिर में होती है 5 बार आरती
अलवर के श्याम मंदिर में खाटू श्याम मंदिर की तरह ही 5 बार आरती की जाती हैं. जिसमें सुबह 5:30 बजे, 8 बजे, दोपहर 12 बजे, शाम 7 बजे व रात्रि 8:30 बजे बाबा की आरती होती है. 251 रुपए के साथ यहां पर भक्तों द्वारा जागरण भी कराया जाता है. मंदिर में आए भक्ति योगेश का कहना है कि कई बार स्थिति ऐसी आ जाती है कि खाटू श्याम मंदिर लोग नहीं जा पाते, तो वह शहर के इस मंदिर में आकर अपनी मनोकामनाएं भगवान के समक्ष पूर्ण होने के लिए रखते हैं. भक्तों का मानना है कि भगवान सभी जगह एक हैं. भक्ति व आस्था मन में होनी चाहिए.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 13:15 IST






