6 बिंदुओं से समझिए कि प्रधानमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं को क्या संदेश दिया

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भोपाल में मंगलवार को ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ रैली की और लाखों कार्यकर्त्ताओं को सम्बोधित किया. इस सम्बोधन में पीएम ने जहां एक और अपनी सरकार के नीति नियति को साफ किया वहीं विपक्षी पार्टियों की पोल भी खोली.

पीएम मोदी ने भोपाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपने संबोधन में कई बातें कहीं जो भारत के लिए उनके दृष्टिकोण, पार्टी कार्यकर्ताओं को उनके संदेश और ऐसे अन्य मुद्दों के बारे में जानकारी देती हैं. आइए छह बिंदुओं के सहारे जानते है पीएम ने अपने कार्यकर्ताओ को क्या दिया है सन्देश.

1. भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह से ‘ना’
पीएम ने सम्बोधन में भ्रष्टाचार पर विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि हाल ही में राजनीतिक चर्चा में एक  नए शब्द की एंट्री हुई है, वो है ‘गारंटी’. “विपक्ष” क्या गारंटी देता है, इसका प्रचार-प्रसार करना भाजपा कार्यकर्ताओं की प्रमुख जिम्मेदारी है. विपक्ष की पार्टियां भ्रष्टाचार की गारंटी हैं. ये लाखों करोड़ के घोटालों की गारंटी हैं. कुछ दिन पहले विपक्षी दलों के तमाम लोकप्रिय लोगों की मुलाकात हुई थी. अगर इन लोगों का इतिहास देखा जाए तो ये कम से कम 20 लाख करोड़ रुपये के घोटाले की गारंटी देते हैं. पीएम ने यह भी कहा कि विपक्षी पार्टियां घोटाले की गारंटी हैं. पीएम ने कहा कि मैं इस बात की भी गारंटी देता हूं कि गरीबों और देश को लूटने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी.

2. सामाजिक विकास काम करने का मोदी का तरीका अलग है
पीएम ने अपने सम्बोधन में आज जल जीवन मिशन का जिक्र किया और कहा कि जल जीवन मिशन देश में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बदल रहा है. बुनियादी ढांचे में बदलाव के अलावा, जल जीवन मिशन सामाजिक परिवर्तन का अग्रदूत बना है. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कुछ ऐसे गाँव हुआ करते थे जहां व्यावहारिक रूप से पानी का कोई कनेक्शन नहीं था, और लोग उन गांवों में अपनी बेटियों की शादी करने से मना कर देते थे।. अब, जल जीवन मिशन के बाद, यह अतीत की बात हो गई है. समाज ये एक बड़ा बदलाव हुआ है.

3. तुष्टिकरण की राजनीति स्वीकार्य नहीं
पीएम ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ अपनी पार्टी के लिए जीते हैं, पार्टी का ही भला करना चाहते हैं. वे यह सब इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें भ्रष्टाचार, कमीशन, कट मनी में अपना हिस्सा मिलता है. उन्होंने जो रास्ता चुना है उसमें ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं है. उनका मार्ग तुष्टिकरण का है. वहीं बीजेपी ने तुष्टिकरण के रास्ते पर नहीं चलने का फैसला किया है. हमारा मानना ​​है कि देश का भला संतुष्टि में है ना कि तुष्टिकरण में है.

4. वंशवाद की राजनीति से हो रहा देश को नुकसान
आज के सम्बोधन में पीएम ने वंशवाद पर तीखा प्रहार किया है. उन्होंने कहा कि वंशवाद से युवाओं को नुकसान पहुंचाता है. उन्होंने कहा कि अगर आप गांधी परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो कांग्रेस को वोट दें. यदि आप यादव परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो सपा को वोट दें. अगर आप लालू परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो राजद को वोट दें. अगर आप शरद पवार परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो एनसीपी को वोट दें. अगर आप अब्दुल्ला परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो नेशनल कॉन्फ्रेंस को वोट दें. अगर आप करुणानिधि परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो डीएमके को वोट दें. यदि आप केसीआर परिवार के बेटे-बेटियों का कल्याण चाहते हैं तो बीआरएस को वोट दें. उन्होंने कहा कि लेकिन अगर आप आप अपने बेटे, अपनी बेटी और अपने परिवार का कल्याण चाहते हैं तो भाजपा को वोट दें.

5. मुद्रा स्फ़ीति
महंगाई को लेकर विपक्ष हमेशा केंद्र सरकार पर हमला करता है, आज पीएम ने इस मुद्दे पर भी खुलकर अपनी राय रखी और कहा भारत ने मुद्रास्फीति को कैसे लगाम लगा रखा है ये दुनिया जानती है. उन्होंने कहा कि भारत ने कोविड संकट और यूक्रेन युद्ध के बावजूद मुद्रास्फीति पर काबू पा लिया है. हमारे पड़ोसी देश महंगाई से जूझ रहे हैं. पाकिस्तान में महंगाई दर 38 फीसदी से ज्यादा है. श्रीलंका 25 फीसदी महंगाई दर से जूझ रहा है. बांग्लादेश में मुद्रास्फीति की दर लगभग 10 प्रतिशत है. वहीं भारत में मुद्रास्फीति की दर 5 प्रतिशत से कम है.

6. जातिवाद की राजनीति पर भी हमला बोला
पीएम ने तुष्टिकरण की राजनीति की आलोचना की और लोगों को जाति के आधार पर बांटने के लिए विपक्ष पर हमला बोला. उन्होंने कहा किया कि लोगों को ये समझना पड़ेगा कि कैसे यूपी, बिहार, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु की विभिन्न जातियां जाति की राजनीति से पीड़ित हैं और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है. पीएम ने लोगो को आगाह किया कि इस जातिवाद की राजनीति से लोगों को बचना चाहिए.

Tags: BJP, Narendra modi, PM Modi

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Author: Jagran Times

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