
स्वपनदीप जोशी/टोंक. जिले में नगरफोर्ट के मांडकला तालाब की पाल पर धाकड़ समाज के आराध्य धरणीधर भगवान का मंदिर राष्ट्रीय मंदिर घोषित किया गया है. इस मंदिर का निर्माण चित्तौड़गढ़ के सावलियाजी मंदिर की तर्ज पर किया गया है. कमेटी के लोग बताते हैं कि यहां पर 12 करोड़ की लागत से मंदिर का निर्माण हुआ है, यह करीब 60 साल पुराना मंदिर हैं. मंदिर का निर्माण बंसी पहाड़पुर के लाल पत्थर से करवाया गया है. करीब 50 हजार घन फीट पत्थर काम में आया है. उड़ीसा के कारीगरों सहित बूंदी जिले के कारीगर ने मंदिर निर्माण किया था.
धाकड़ समाज समिति के अध्यक्ष हेमराज धाकड़ ने बताया कि आराध्य धरणीधर मंदिर का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था. अखिल भारतीय श्री धाकड़ समाज ने इस मंदिर को धाकड़ समाज का राष्ट्रीय मंदिर घोषित कर रखा है. मंदिर 8 साल में बनकर तैयार हुआ है. कोरोना के कारण 2 साल तक मंदिर का काम बंद रहा था.
भगवान धरणीधर की 3 फीट 3 इंच की प्रतिमा
इस मंदिर में गर्भ गृह में 4 पिल्लर हैं. इनकी ऊंचाई 15 फीट 11 इंच, चौड़ाई 14 फीट 11 इंच है. गर्भ गृह के बाहर मंडप की चौड़ाई व लंबाई 42 गुणा 42 फीट है. मंडप के 14 पीलर की प्रत्येक की ऊंचाई 15 फीट 11 इंच और मंडप की ऊंचाई फर्श से झूमर तक 30 फीट है. गर्भ गृह बनाने में 25 टन वियतनाम का सफेद चमकदार पत्थर लगाया है. मंडप के बाहर चौवारा में 4 पिल्लर हैं. इनकी चौड़ाई 14 फीट 11 इंच है. इसकी उचाई धरातल से 100 फीट है , 85 मुख्य सीढ़ियां और 26 अन्य सीढ़ियां भी इस मंदिर में हैं. इस मंदिर की लम्बाई 150 फीट और चौड़ाई 100 फीट है और भगवान धरणीधर की 3 फीट 3 इंच की प्रतिमा है. सिंहासन 9 फीट लंबा, 9 फीट ऊंचा और 3 फीट चौड़ा है.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 17:09 IST






