उदयपुर में आ रहे हैं तो पालीवाल की स्पेशल कचौड़ी का करें टेस्ट, 45 साल से इसके दीवाने हैं स्वाद के शौकीन

निशा राठौड/उदयपुर. उदयपुर का नाम आते ही खूबसूरत झीलें पहाड़, हवेलिया, महल आदि आंखों के सामने नजर आ जाते हैं. लेकिन, उदयपुर का सफर केवल यहीं तक ही नहीं सिमटा हुआ है. यहां के चटपटे, मजेदार लजीज खानों के बिना पुराने शहर की तंग गलियों का सफर तो अधूरा ही कहलाता है. पुराने शहर का स्वाद भी उसकी उम्र की ही तरह पुराना है.

लेकिन, नौजवान पीढ़ियों को ये यहां तक खींच लाता है. साथ ही जो लोग खाने के शौकीन हैं. उनके कदम तो यहां की खुशबू और स्वाद के कारण खुद-ब-खुद आ जाते हैं. आज हम आप ऐसे ही लजीज स्वाद के बारे में बताने जा रहे हैं, जो है खास पालीवाल कचौरी. इसके स्वाद के दीवाने न सिर्फ शहरवासी है बल्कि यहां आने वाले पर्यटक भी इसे बहुत पसंद करते हैं.

45 साल से स्वाद बरकरार
इन कचौड़ियों की खासियत यह है कि पिछले 45 सालों से इनका स्वाद व अंदाज वही है. साल 80 के दशक में तीन भाइयों मांगीलाल सत्यनारायण और हरीश पालीवाल और ओम पालीवाल ने इसे शुरू किया था. उनके साथ उनका भतीजा दिलीप पालीवाल भी उनकी मदद करता है. इसके लिए वे सुबह 4 बजे उठ जाते हैं और दिन में दो-ढाई बजे तक कचौड़ियां बनाते हैं. हर दिन करीब 700 से 800 कचौरियां बना लेते हैं और रविवार के दिन इसकी संख्या दुगनी हो जाती है.

पर्यटकों भी हैं इनके दीवानें
उदयपुर के जगदीश चौक में स्थित पालीवाल रेस्टोरेंट पर बनने वाली इस कचौड़ी की खुशबू आस पास के गुमाने वाले पर्यटकों को अपनी तरफ खींचती है. सुबह 7 बजे से इनकी दुकान पर भीड़ जुटना शुरू हो जाती है.जो दोपहर तक चलती रहती है. यहां आने वाले पर्यटक जब दुबारा उदयपुर आते हैं तो इस कचौड़ी का स्वाद चखने से चूकते हैं.

यहां पर कचौड़ी के साथ समोसा, आलूबड़ा, मिर्ची पकोड़ा,पकोड़े , जलेबी भी बनाई जाती है,साथ ही इसे हरी और मीठी चटनी के साथ परोसा जाता है.एक प्लेट की कीमत 15 रूपय है और सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक यहां कचौड़ी मिलती है.

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Author: Jagran Times

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