
हाइलाइट्स
राहु ग्रह को धार्मिक उन्माद का कारक ग्रह माना जाता है.
इस समय शनि ग्रह स्वराशि कुंभ में वक्री हैं.
Samsaptak Yoga : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक ग्रह एक समय अंतराल से एक राशि से दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं, इस प्रक्रिया को ग्रह गोचर कहते हैं. वहीं, शनि ग्रह की वक्री चाल यानी कि उसी राशि में शनि का उल्टी चाल चलना शनि ग्रह का वक्री होना कहलाता है. न्याय के देवता शनि ने 17 जून 2023 से कुंभ राशि में उल्टी चाल शुरू की है. शनि, राहु और मंगल पाप ग्रह माने जाते हैं, परंतु शनि न्याय का कारक ग्रह भी है. शनि को मंगल का शत्रु माना जाता है और मंगल ग्रह अग्नि तत्व की राशि सिंह में 1 जुलाई 2023 को प्रवेश करेगी, जिसके कारण शनि मंगल समसप्तक योग बना रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सिंह और कुंभ दोनों राशि शत्रु राशि है. ऐसे में इस योग का निर्माण देश के लिए अशुभ माना जा रहा है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.
देश में होगी बड़ी हलचल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एक अन्य विशेष योग गुरु राहु के द्वारा निर्मित हो रहा है. इस समय राहु गुरु को पीड़ित कर रहा है और शनि ग्रह मेष राशि के ऊपर नीच की दृष्टि बनाए हुए हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देव गुरु बृहस्पति को अदालत का कारक ग्रह माना जाता है. इस समय शीर्ष अदालत किसी बड़े मुद्दे पर फैसला सुना सकती है, जिसका असर देश की जनता पर प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलेगा.
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राहु ग्रह को धार्मिक उन्माद का कारक ग्रह माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के जानकार के अनुसार, ऐसे में देश की जनता किसी बड़ी गलतफहमी का शिकार हो सकती है, जिसकी वजह से विकराल हिंसा देखने को मिल सकती है.
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 1 जुलाई 2023 से 16 अगस्त 2023 तक मंगल और राहु ग्रह पर शनि की दृष्टि बनी रहेगी, जिसकी वजह से ना सिर्फ धार्मिक उन्माद हो सकता है, बल्कि देश में अत्यधिक वर्षा होने की भी आशंका है. इसके अलावा, मंगल और शनि का यह समसप्तक योग पहाड़ी क्षेत्र में भूस्खलन और भूकंप भी ला सकता है.
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Tags: Astrology, Dharma Aastha, Predictions, Religion
FIRST PUBLISHED : June 26, 2023, 03:35 IST





