
सोनिया मिश्रा/चमोली. उत्तराखंड के चमोली जिले में युवा अब लगातार स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे है. अक्सर पहाड़ों में फसलें जंगली जानवर बर्बाद कर देते है. जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है. इसलिए वे मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, सब्जी उत्पादन के साथ साथ फूलों की खेती को भी अपना रहे हैं. इस काम में युवाओं को संबंधित विभाग भी पूरी तरह से सहयोग कर रहा है.
इन दिनों चमोली जिले के किसान सजावट के लिए सबसे ज्यादा डिमांड में रहने वाले लीलियम की खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं. बता दें कि विभाग द्वारा लीलियम की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए जिले के 20 किसानों के 1200 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस के अंतर्गत लगभग 25 हजार लीलियम कंदों का रोपण किया किया था, जिनसे अब उत्पादन शुरू हो गया है. साथ ही अभी शुरुआत में ही किसानों द्वारा करीब 3000 से अधिक स्टिक तैयार कर बेच दी गई हैं.
उद्यान विभाग की मार्केटिंग से हुआ लाभ
लिलियम की खेती कर रहे किसानों ने बताया कि, वह पहले से भी फूलों की खेती करते आ रहे हैं, लेकिन मार्केटिंग न होने के कारण उन्हें फूलों को बेहद कम दाम में बेचना पड़ता था. लेकिन अब उद्यान विभाग चमोली के द्वारा मार्केटिंग की अच्छी व्यवस्था करने के बाद काश्तकार अपने उत्पाद को देहरादून, दिल्ली तक भी भेजा जा रहा है. यही नहीं उद्यान विभाग के द्वारा सजावट में उपयोग लाये जाने वाले फूल जरबेरा की खेती भी चमोली में काश्तकारों से करवाई गई है. साथ ही पूर्व में चमोली उद्यान विभाग ने ट्यूलिप की खेती कर काफी सुर्खियां भी बटोरी थी.
लीलियम पर मिल रही 80 फीसदी सब्सिडी
उद्यान अधिकारी तेजपाल सिंह ने बताया कि लीलियम का पौधा और फूल सजावट के काम भी आते हैं. जबकि मैदानी क्षेत्रों में हमेशा मांग में भी रहता है. इसके लिए हमने किसानों को 80 फीसदी सब्सिडी के साथ लीलियम कंदों का वितरण किया था. इसके बाद लगभग 60-70 दिनों बाद फूलों को किसानों ने बेचना भी शुरू कर दिया है. इससे किसानों की आमदनी बढ़ ही रही है.
.
Tags: Agriculture Market, Chamoli News, Local18, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : June 25, 2023, 21:23 IST





