
हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लंबे समय के बाद जिला अस्पताल में अब गंभीर मरीजों को आईसीयू की सुविधा मिलने लगी है. जिला अस्पताल प्रबंधन सीमित संसाधनों में ही यहां मरीजों को आईसीयू की सेवा दे रहा है. आईसीयू की सेवा मिलने के बाद यहां कुछ राहत मरीजों को जरूर मिलेगी, लेकिन ज्यादा गंभीर मरीजों को अभी भी मैदानी क्षेत्रों की ओर ही रेफर होना पड़ेगा. क्योंकि अभी जिला अस्पताल के मौजूदा स्टाफ से ही लेवल-1 तक का आईसीयू चलाया जा रहा है.
अस्पताल में अभी भी स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है. जिले में बेस अस्पताल तो बनकर तैयार हो गया है लेकिन वह भी अभी नाममात्र का ही है. यह सब सुविधाएं बेस अस्पताल में मिलनी चाहिए थी. लेकिन अभी तक बेस अस्पताल को ना डॉक्टर मिले हैं और ना ही अन्य कोई तकनीकी स्टाफ. जिसे देखते हुए जिला अस्पताल प्रबंधन ने अब अपने ही संसाधनों से हॉस्पिटल में आईसीयू की सेवा मरीजों को देनी शुरू कर दी है, जिससे थोड़ी बहुत राहत उन्हें मिल रही है.
5 सालों से नहीं मिला आईसीयू के लिए स्टाफ
पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेएस नबियाल ने जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 5 सालों से जिला अस्पताल में लगे आईसीयू के लिए कोई स्टाफ उन्हें नहीं मिल पाया है. सीमांत और दुर्गम जिला होने के कारण गंभीर मरीज रेफर ही होते हैं. ऐसे में उन्हें थोड़ी राहत देते के लिए सीमित संसाधनों में ही लेवल-1 का आईसीयू शुरू कर दिया गया है, जिसे मौजूदा स्टाफ ही चला रहा है.
दबाव में किया जा रहा आईसीयू का संचालन
वहीं देखा जाए तो जिले की जनता को बेस अस्पताल में अभी स्वास्थ्य सेवाएं मिलने का लोगों को बेसब्री से इंतजार है. बावजूद अभी तक यहां मरीजों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही हैं. जिससे जिला अस्पताल पर दबाव बढ़ रहा है. इस बारे में पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने इसे सरकार की नाकामी बताया है. साथ ही उन्होंने कहा कि बिना जरूरी पद स्वीकृत किए अस्पताल में आईसीयू का संचालन दबाव में किया जा रहा है क्योंकि सरकार बेस अस्पताल को चलाने में असमर्थ साबित हो रही है.
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FIRST PUBLISHED : June 25, 2023, 20:52 IST





