
नई दिल्ली. किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए जितना मेहनत करना और लक्ष्य को बना कर उसकी तरफ हर मुश्किलों को पार करना जरूरी होता है. उतना ही जरूरी होता है सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के दौरान जमीन से जुड़ा रहना. ऐसा करने वाला न केवल लोगों के बीच अपनी उपस्थिति को कायम रखता है बल्कि सफलता का असल स्वाद भी उसी को मिलता है. ये मानना है गीतकार धरमवरी थांडी का. पंजाबी संगीत उद्योग में थांडी के उभरता सितारा है. वे अपने पारंपरिक और आधुनिक पंजाबी संगीत के लिए जाने जाते हैं.
पंजाब में जन्मे और पले-बढ़े धर्मवीर थांडी लोक संगीत से काफी प्रभावित थे और इसी के साथ वे समकालीन संगीत की ओर भी आकर्षित थे और उन्हें पुराने को नए के साथ मिलाने की तीव्र इच्छा महसूस हुई. थांडी की यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने स्थानीय कार्यक्रमों में प्रदर्शन करना शुरू किया. उनकी आवाज ने संगीत निर्माताओं और प्रमोटरों का ध्यान आकर्षित किया. जल्द ही, उन्हें संगीत रिकॉर्ड करने और अन्य बड़े कलाकारों के साथ सहयोग करने का अवसर दिया गया.
थांडी के सबसे उल्लेखनीय ट्रैक में से एक पंजाब दियां यादां काफी लोकप्रिय रहा. यह गीत पंजाब की सांस्कृतिक विरासत के सार को खूबसूरती से दर्शाता है और इसमें समकालीन तत्वों को भी शामिल किया गया है. अब उनकी लोकप्रियता पंजाब की सीमाओं से आगे बढ़ गई है. उनके संगीत ने विश्व स्तर पर एक समर्पित प्रशंसक आधार तैयार किया है. थांडी का स्टारडम प्रभावशाली रहा है, फिर भी वह जमीन से जुड़े हुए हैं और अपनी कला के प्रति प्रतिबद्ध हैं.
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FIRST PUBLISHED : January 25, 2023, 02:49 IST






