
हाइलाइट्स
विवादास्पद बयानों और स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का चोली-दामन का साथ बरकरार
सुर्खियां बटोरने के लिए विवादित बयान देने के बाद यूडीएच मंत्री खुद भी मांग चुके हैं माफी
सोनिया के आदेश के खिलाफ समानांतर बैठक बुलाने के चलते सीएम को मांगनी बड़ी थी माफी
(एच. मलिक)
उदयपुर. विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाले राजस्थान सरकार (Rajasthan Government) के स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल (Shanti Kumar Dhariwal) एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर ही चर्चाओं में हैं. यह अलग बात है कि हमेशा दूसरों पर निशाने साधते रहे यूडीएच मंत्री इस बार अपने बयान पर खुद ही घिर गए हैं. जयपुर के मंत्री-विधायकों से जुड़े उनके बयान ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) के साथ उनकी खुल्लमखुल्ला तू-तू मैं-मैं की याद ताजा कर दी है. उदयपुर में 180 करोड़ की लागत से सीवरेज प्रोजेक्ट को लेकर रेती स्टैंड स्थित आवरी माता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में समारोह में बोलते हुए यूडीएच मिनिस्टर धारीवाल जयपुर के मंत्री और विधायकों के निशाने पर आ गए.
प्रदेश में स्मार्ट सिटी में चार शहर कोटा, अजमेर, जयपुर व उदयपुर लिए गए हैं. यूडीएच मंत्री धारीवाल ने खुलासा किया कि इनमें सबसे ज्यादा पिछड़ा हुआ काम राजधानी जयपुर का ही है. उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए यहां के तीन-तीन मंत्री और छह-छह विधायक पूरी तरह जिम्मेदार हैं. ये ही सबसे बड़ी समस्या हैं. अगर न मंत्री होते, न विधायक होते तो काम समय पर पूरे हो जाते. उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि इन मंत्री-विधायकों के आपसी विवाद पैदा हो जाते हैं, इसलिए काम अटक जाते हैं. कोई कहता है कि यह योजना लाओ. कोई कहता यह योजना लाओ. कोई कहता है इसको बदलो और इसको करो. इसी में सारे काम उलझते चले जाते हैं. फैसला करने वाला एक व्यक्ति हो और उसका आदेश चलता हो तो निश्चित रूप से काम भी समय पर पूरे होते हैं.
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जयपुर के प्रभारी मंत्री धारीवाल को सुनाई थी खरी-खरी
जयपुर के पिछड़ने पर यह बयान देते हुए मंत्री धारीवाल शायद भूल गए कि जयपुर के प्रभारी मंत्री रहते हुए दो साल पहले प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने उन्हें कैसे खरी-खरी सुनाई थी. तब सीएम आवास पर बुलाई गई कैबिनेट की बैठक में धारीवाल और डोटासरा में जबर्दस्त भिड़ंत हुई. तब डोटासरा ने तेज आवाज में धारीवाल को आड़े हाथों लेते हुए कहा था, ‘इतनी देर से डींगें हांक रहे हो. आपने जयपुर के प्रभारी रहते ढाई साल में आज तक एक मीटिंग तक नहीं ली. काहे के प्रभारी हो आप? आपका यह एटीट्यूड पार्टी के लिए ठीक नहीं है, इसकी रिपोर्ट मैं सोनिया गांधी को दूंगा. मैं उम्र का लिहाज कर रहा हूं.’ इस पर धारीवाल बिफर गए थे. दोनों झगड़ते और बांहें चढ़ाते हुए पास आने लगे तो साथी मंत्रियों ने दोनों को अलग किया.
यूडीएच मंत्री ने कोटा को चमकाया, जयपुर को भुलाया
राजधानी के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में धारीवाल के उदयपुर में दिए गए बयान से रोष है. उनका कहना है कि जयपुर के प्रभारी मंत्री के रूप में फैसला लेने वाले तो वही एक जिम्मेदार थे. उन्होंने खुद का दायित्व को निभाया नहीं और सारा ध्यान कोटा को ही चमकाने और वहां के प्रोजेक्ट को तेजी से पूरा करने में लगाया. कांग्रेस नेताओं के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने तब सही ही कहा था कि प्रभारी मंत्री ने जयपुर में बैठक तक लेने की जरूरत नहीं समझी. यदि उनका फोकस कोटा के साथ-साथ जयपुर पर भी होता तो राजधानी के प्रोजेक्ट और विकास कार्य ऐसे न पिछड़ते.
अजब तमाशा! नाते जाकर देवर के लिए मांगती हैं नौकरी
यह पहली बार नहीं है, जबकि यूडीएच मिनिस्टर ने ऐसा विवादित बयान दिया है. इससे पहले भी वे कई बार इस तरह की बयानबाजी कर चुके हैं. पुलवामा के शहीदों की वीरांगनाओं के मामले में भी वे विधानसभा में ऐसा ही बयान दे चुके हैं. उन्होंने सदन में कहा था कि रोहिताश लांबा की पत्नी का देवर तो पहले से शादीशुदा था. उसके दो बच्चे हैं. फिर वो उसके नाते चली गई. अब नाते जाकर कहती है कि मेरे देवर को नौकरी दो. भाई वाह, अजीब तमाशा है. देवर को नौकरी दो. कहीं ऐसा हुआ है कि नियमों के खिलाफ किसी को नौकरी मिल गई हो.
आलाकमान की नाफरमानी, गहलोत को मांगनी पड़ी माफी
राजस्थान कांग्रेस में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अगुवाई में पिछले साल 25 सितम्बर को बवाल हुआ था. सोनिया गांधी के आदेश पर विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी. मल्लिकार्जुन खरगे और अजय माकन तब आब्जर्वर के रूप में जयपुर आए, लेकिन शांति धारीवाल ने इस अधिकृत विधायक दल का बहिष्कार कर समानांतर बैठक आयोजित कर दी. इसके चलते सोनिया गांधी द्वारा भेजे गए एक लाइन का प्रस्ताव और सचिन पायलट की उम्मीदों पर पानी फिर गया. तब पायलट ग्रुप के नेताओं ने ही धारीवाल की बैठक को कांग्रेस आलाकमान को ब्लैकमेल करने की कोशिश और सोनिया गांधी का अपमान बताया था. बात इतनी बढ़ी कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिल्ली जाकर 25 सितंबर को हुए ‘धारीवाल एपिसोड’ के लिए माफी मांगनी पड़ी.
रेप पर विधानसभा में बोले…यह राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश
यूडीएच मिनिस्टर महिलाओं को अपमानित करने वाले बयान में देशभर में सुर्खियों में आ गए थे. विधानसभा में धारीवाल ने पुलिस और जेल की अनुदान मांगों पर बहस का जवाब देते हुए राजस्थान में बढ़ते बलात्कार के मामलों पर कहा था, ‘रेप के मामले में हम नंबर एक पर हैं. अब ये रेप के मामले क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है…फिर हंसते हुए आगे कहा- वैसे भी यह राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश रहा है यार, उसका क्या करें’? यह कहकर धारीवाल फिर हंसे तो कई मंत्री और कांग्रेस विधायक भी उनके साथ हंसने लगे. बीजेपी ने इसे महिलाओं का अपमान बताते हुए धारीवाल का कड़ा विरोध किया. हड़कंप मचने के उन्होंने माफी मांगते हुए कहा कि यह स्लिप ऑफ टंग के कारण हुआ.
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 10:09 IST






