क्या आप जानते हैं? एक ही ट्रैक पर कितनी दूरी पर चलती हैं दो ट्रेनें, पीछे की ट्रेन के बारे में कैसे पता चलता है ड्राइवर को

हाइलाइट्स

जान माल की सुरक्षा के साथ ट्रेनों का संचालन करना रेलवे की जिम्मेदारी है.
रेलवे में हर एक छोटी छोटी चीजों पर ध्यान दिया जाता है.
जिसके चलते रेलवे ने ट्रेनों को चलाने के लिए कई नियम बनाए हैं.

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए कई तरह के एहतियात बरतता है. यह टेक्नोलॉजी व अपने कर्मचारियों की मदद से लगातार सफर को सुरक्षित और आरामदायक बनाने की कोशिश में रहता है. चूंकि, यह लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी बात है इसलिए लोग उन तकनीकों व तरीकों के बारे में जानने के लिए काफी उत्सुक भी रहते हैं जिनका इस्तेमाल ट्रेनों के परिचालन में किया जाता है. आज हम आपको ऐसी ही एक मजेदार रेलवे नॉलेज देंगे.

क्या आप जानते हैं रेलवे में एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनों के बीच कितनी दूरी रखी जाती है, जिससे दो ट्रेनें आपस में न भिड़े? इसके लिए किस सिस्टम का पालन किया जाता है? लोको पायलट को पीछे चल रही दूसरी ट्रेन के बारे में जानकारी कैसे मिलती है? चलिए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं…

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किस सिस्टम का किया जाता है यूज
ट्रेनों की दूरी को मैनटेन करने के लिए दो सिस्टम का पालन किया जाता है. Absolute Block System और Automatic Block Working. Absolute Block System के तहत दो ट्रेनों के बीच 6 से 8 किलोमीटर की दूरी रखी जाती है. ट्रेन जब एक स्टेशन से निकलकर दूसरी स्टेशन को पर पहुंच जाती है, तब स्टेशन मास्टर पिछले स्टेशन मास्टर को फोन से सूचना दे देता है. कई बार स्टेशन की दूरी 10 से 15 किलोमीटर की भी होती है, ऐसे में ट्रेन को निकलने में थोड़ा समय लगता है. वैसे अब सभी जगह ऑटोमेटिक ब्लॉक वर्किंग (Automatic Block Working) सिस्टम को लागू कर दिया गया है.

क्या है ऑटोमेटिक ब्लॉक वर्किंग
रेलवे के सामान्य नियम के अनुसार जहां भी ऑटोमैटिक सिग्नलिंग ब्लाक सेक्शन हैं, वहां एक ही लाइन पर एक से अधिक गाड़ियों का सुरक्षित परिचालन एक ही समय में सिग्नल के आधार पर किया जाता है. आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम में दो से अधिक ट्रेनें एक ही ट्रैक पर कुछ अंतराल पर सुरक्षा के सारे मानदंडों के अनुसार चलती हैं. इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें पटरियो के किनारे लगे बॉक्स से ऑटोमेटिक सिग्नल का संचालन किया जाता है, जिसे लोको पायलट को सिग्नल मिल जाता है.

जैसे ही ट्रेन एक सिग्नल से क्रॉस होती है तब वह सिग्नल लोकोमोटिव के गुजरने के बाद तुरंत लाल हो जाता है. वहीं, जब ट्रेन दूसरे सिग्नल को क्रॉस करेगी, तब पिछला सिग्नल पीला हो जाता है. इसके बाद ट्रेन जैसे ही तीसरे सिग्नल को भी क्रॉस करती है तब पिछला सिग्नल डबल पीली बत्ती दिखाएगा, यानी पीछे से आ रही ट्रेन 50 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है.

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Author: Jagran Times

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