सचिन पायलट से नजदीकी, CM अशोक गहलोत से अदावत, जानें कौन हैं संन्यास का ऐलान करने वाले दीपेंद्र सिंह शेखावत

जयपुर. राजस्थान में चुनाव से 5 महीने पहले ही कांग्रेस के बड़े नेता सियासत के पिच पर संन्यास की घोषणा करने में जुटे हैं. शेखावाटी और बीकानेर संभाग के दिग्गज नेताओं ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया. दोनों ही पूर्व में मंत्री भी रह चुके हैं. कई साल से सियासी उपेक्षा से परेशान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया है. श्रीमाधोपुर में अपनी जनता के बीच दीपेंद्र ने यह घोषणा कर लोगों को हैरान कर दिया. मगर यह कोई चौंकाने वाला फैसला भी नहीं था. दीपेंद्र सिंह शेखावत चार साल से अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाये हुए थे. सचिन पायलट से नजदीकी और सीएम अशोक गहलोत से उनकी अदावत जगजाहिर थी.

श्रीमाधोपुर में एक जलसे में दीपेंद्र सिंह शेखावत ने कह कि अब मैं तीन-चार महीने का विधायक हूं. इसके बाद आचार संहिता लग जाएगी. स्वास्थ्य कारणों से मैंने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. मेरे से जो बन पड़ा, उतनी सेवा की है. चार दशक से श्रीमाधोपुर की जनता की सेवा का मुझे मौका मिला.

कौन हैं दीपेंद्र सिंह शेखावत
दीपेंद्र सिंह शेखावत श्रीमाधोपुर से वर्तमान में विधायक, पूर्व में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष, 1998 से 2003 की गहलोत की पहली सरकार में मंत्री रहे. मगर इस बार शेखावत को जब मंत्री नहीं बनाया गया तो उन्होंने सचिन पायलट कैंप का रूख किया. हमेशा पायलट के साथ दिखाई दिए. तीन साल पहले की राजनीतिक उठापटक के दौर में सचिन पायलट का पूरा साथ दिया. मगर अब लगता है कि नेताजी को अपनी सियासी चमक फीकी पड़ने का अहसास है, इसलिए समय से पहले ही उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया है.
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भरतसिंह कुन्दनपुर,गुरमीत कुन्नर भी कर चुके संन्यास की घोषणा
कांग्रेस के कई विधायक चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. इनमें सांगोद से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री भरतसिंह कुन्दनपुर भी हैं. भरत सिंह सत्ता के नशे को शराब से भी खतरनाक नशा करार देते हुए मुख्यमंत्री तक को चुनावी मैदान से हट जाने की सलाह दे चुके हैं. शिव से कांग्रेस विधायक अमीन खान भी कई बार चुनाव नहीं लड़ने की बात बोल चुके हैं. श्रीगंगानगर जिले से विधायक गुरमीत कुन्नर का भी सियासत से मोहभंग हो चुका है. कुन्नर ने तो बकायदा सुखजिंदर रंधावा से मुलाकात कर अपने बेटे रूबी कुन्नर को टिकट देने की मांग की. कुन्नर बोले कि बुढ़ापा आ गया है. सेहत साथ नहीं दे रही. अब बेटे को राजनीति का वारिस बनाना चाहता हूं. कोई और कांग्रेस से टिकट ही नहीं मांग रहा. जो टिकट मांगते हैं, वो घिसे पिटे नेता हैं. बता दें कि जो नेता चुनावी मैदान से हटने का एलान कर रहे हैं, उनका भरा पूरा राजनीतिक जीवन रहा है. कई बार विधायकी के साथ मंत्री रह चुके हैं. मगर इस बार मंत्री नहीं बन पाने की पीड़ा उन्हें सियासत से संन्यास को मजबूर कर रही है.

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Author: Jagran Times

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