AI से समझाया भारत-अमेरिका संबंध, आतंकवाद, रूस-यूक्रेन जंग का किया जिक्र, US संसद में पीएम मोदी की 10 बड़ी बातें

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वॉशिंगटन. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार अमेरिका संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया. पीएम मोदी ने जैसे ही संसद में प्रवेश किया, अमेरिकी सांसदों ने उनका खड़े होकर तालियां बजाई और मोदी-मोदी के नारे लगाए. पीएम मोदी ने अमेरिकी संसद के बहाने अपने संबोधन में इंडिया स्टोरी, विजन और रोडमैप को सामने रखा और बताया कि क्यों आने वाला दौर भारत का है और क्यों भारत दुनिया के लिए संकट मोचक बन सकता है. पीएम माेदी के भाषण के दौरा 15 बार स्टैडिंग ऑवेजन दिया गया. 79 बार तालियां बजाई गईं.  प्रधानमंत्री मोदी ने AI के जरिए भारत और अमेरिका के रिश्तों की गर्माहट को समझाने की कोशिश की. वहीं, पाकिस्तान का नाम लिया बिना कहा कि आतंकवाद के समर्थकों काे रोकना जरूरी है. पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरता इस दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है.

पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा. पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत बढ़ता है तो पूरी दुनिया बढ़ती है. उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ है. हम बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. नारी शक्ति पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण सिर्फ महिलाओं को लाभ पहुंचाने वाले विकास का नहीं है. यह महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास का है.

प्रधानमंत्री के भाषण की 10 अहम बातें

पिछले कुछ वर्षों में AI- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में काफी प्रगति हुई है. साथ ही, एक अन्य एआई- अमेरिका और भारत में और भी महत्वपूर्ण विकास हुआ है.

“मैं धैर्य, अनुनय और नीति की लड़ाई से जुड़ सकता हूं. मैं विचारों और विचारधारा की बहस को समझ सकता हूं. लेकिन मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि आप दो महान लोकतंत्रों – भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संबंधों का जश्न मनाने के लिए एक साथ आए हैं.

अमेरिका की स्थापना समान लोगों वाले राष्ट्र के दृष्टिकोण से प्रेरित थी. यहां लाखों लोग हैं जिनकी जड़ें भारत में हैं, उनमें से कुछ इस कक्ष में गर्व से बैठते हैं और एक मेरे पीछे है. पीएम मोदी ने कमला हैरिस की तरफ इशारा किया.

लोकतंत्र हमारे पवित्र और साझा मूल्यों में से एक है. पूरे इतिहास में एक बात स्पष्ट रही है कि लोकतंत्र वह भावना है जो समानता और सम्मान का समर्थन करती है. लोकतंत्र वह विचार है जो बहस और चर्चा का स्वागत करता है. लोकतंत्र वह संस्कृति है जो विचार और अभिव्यक्ति को पंख देती है. भारत को प्राचीन काल से ही ऐसे मूल्यों का सौभाग्य प्राप्त है. भारत लोकतंत्र की जननी है.

जब मैंने पीएम के रूप में पहली बार अमेरिका का दौरा किया था, तो भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. आज, भारत 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. भारत जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा. हम न केवल बड़े हो रहे हैं, बल्कि बढ़ भी रहे हैं।” तेजी से. जब भारत बढ़ता है तो पूरी दुनिया बढ़ती है.

हमारे पास 2,500 से अधिक राजनीतिक दल हैं. भारत के विभिन्न राज्यों में लगभग 20 अलग-अलग पार्टी शासन करती हैं. हमारी 22 आधिकारिक भाषाएं और हजारों बोलियां हैं, फिर भी हम एक स्वर में बोलते हैं.

हमारा दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ है. हम बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. हमने 150 मिलियन से अधिक लोगों को आश्रय प्रदान करने के लिए लगभग 14 मिलियन घर दिए हैं, जो ऑस्ट्रेलिया की आबादी का लगभग 6 गुना है.

आज डिजिटल परफोरेंस गोपनीयता की रक्षा करते हुए लोगों के अधिकारों और सम्मान को सशक्त बना रही है. पिछले 9 वर्षों में एक अरब लोगों को उनके बैंक खातों और मोबाइल फोन से जुड़ी एक अद्वितीय डिजिटल बायोमेट्रिक पहचान मिली है. यह डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा हमें वित्तीय सहायता के साथ सेकंड के भीतर नागरिकों तक पहुंचने में मदद कर रहा है. 850 मिलियन लोगों को उनके खातों में सीधा वित्तीय हस्तांतरण प्राप्त होता है. साल में तीन बार एक बटन के क्लिक पर 100 मिलियन से अधिक किसानों को उनके बैंक खातों में सहायता प्राप्त हुई. ऐसे हस्तांतरण का मूल्य 320 बिलियन डॉलर से अधिक रहा है.

आज, संयुक्त राज्य अमेरिका हमारे सबसे महत्वपूर्ण रक्षा भागीदारों में से एक बन गया है. आज, भारत और अमेरिका अंतरिक्ष और समुद्र में, विज्ञान और अर्धचालक में, स्टार्टअप और स्थिरता में, तकनीक और व्यापार में, खेती और वित्त में, कला और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में एक साथ काम कर रहे हैं.

यह जंग का दौर नहीं है, बल्कि यह संवाद और कूटनीति का युग है. हम सभी को रक्तपात और मानवीय पीड़ा को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए. हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता हमारी साझेदारी की केंद्रीय चिंताओं में से एक बन गई है. हम एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक का दृष्टिकोण साझा करते हैं. 9/11 हमले के 2 दशक से भी अधिक समय बाद और मुंबई में 26/11 हमले के एक दशक से भी अधिक समय बाद, आतंकवाद और कट्टरवाद अभी भी पूरी दुनिया के लिए खतरा बना हुआ है.

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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 03:25 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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