इस ढाबे की अमृतसरी नान थाली के दीवाने हैं लोग, 27 साल की नौकरी लॉकडाउन में गई थी

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


पीयूष पाठक /अलवर. कहते हैं कि परिस्थितयों चाहे कितनी भी विकट हों अगर उनका डटकर मुकाबला किया जाए तो आगे की राह निकल ही आती है. ऐसा ही करने वाले शख्स हैं अलवर के काला कुआं निवासी सचिन शर्मा. कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन से पहले ​सचिन की​ जिंदगी आराम से गुजर रही थी और वह बतौर एमआर के 27 सालों से काम कर रहे थे. लॉकडाउन हटने के बाद हुई छंटनी में नौकरी चली गई तो उनके सामने बड़ा संकट आ गया. इसके बाद सचिन ने वो किया जो कम ही लोग सोचते हैं. उन्होंने अपने बचपन के पैशन को अपने रोजगार का जरिया बनाया और आज लोग उनके इस काम के दीवानें हैं.

सचिन ने बताया करीब 27 साल तक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी थी. नौकरी जाने के बाद उन्होंने सोचा कि उनको बचपन से खाना बनाने का शौक था, तो क्यों न अपने शौक को अपना प्रोफेशन बनाया जाए. इसके बाद उन्होंने अलवर के बस स्टैंड के पास रोड पर खाना खजाना के नाम से आउटलेट शुरू किया. आज ​सचिन के अमृतसरी नान की थाली के लोग दीवानें हैं और उनके पास पूरे दिन ग्राहकों की भीड़ रहती है.

उन्होंने बताया कि लोगों को हमारी स्पेशलिटी पसंद आ रही है. जिसमें अमृतसरी नान, छोले, दाल मखनी, आलू पराठा, लच्छा पराठा सहित अन्य चीजें हैं. सचिन के यहां 70 रुपए में अमृतसरी नान थाली मिलती है. जिसका स्वाद काफी टेस्टी है. इसके अलावा वह 50 रुपए वाली सिंपल नान भी लोगों को खिलाते हैं. सचिन बताते हैं कि वह और उनकी पत्नी दोनों मिलकर रेस्टोरेंट्स चला रहे हैं. लोगों का इसको लेकर काफी अच्छा रिस्पांस भी आता है. इसके साथ ही यहां आने वाले ग्राहकों को राजस्थानी मनवार के साथ खाना खिलाया जाता है.

खाना खाने आए विजय का कहना है कि यहां के मलिक सचिन का व्यवहार काफी अच्छा है. यहां पर व्यक्ति प्लेट सिस्टम में खाना लेता है तो इसके बाद एडिशनल चीजें लेने पर सचिन कोई पैसा नहीं लेते. यही इनकी खासियत है. जबकि लोग पैसा कमाने के लिए आज एक रुपए भी नहीं छोड़ते हैं. वहीं सचिन एक रोटी का कोई रुपया नहीं ले रहे हैं.

.

FIRST PUBLISHED : June 13, 2023, 17:00 IST

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें