MSC करने के बाद नहीं की नौकरी, गौसेवा को बनाया ध्येय, आज पाले हैं 100 से अधिक गौवंश

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 पीयूष पाठक/ अलवर. जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिकता के साथ युवा आगे बढ़ रहा है और नए नए आयाम स्थापित कर आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा है. वहीं अलवर की बात की जाए तो अलवर का युवा वर्ग इन दिनों खेती और पशुपालन की ओर आगे बढ़ रहे हैं. आज हम आपको अलवर जिले के एक ऐसे युवा के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने पढ़ाई तो देश की राजधानी दिल्ली यूनिवर्सिटी से की. नौकरी न कर पिछले 5 सालों से गौसेवा में अपना मन लगा रहे है. अलवर शहर के रहने वाले भानुप्रताप शर्मा ने साल 2018 से अलवर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित गौ सेवा धाम की शुरुआत की. शुरुआत में में गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को काफी कम शुल्क पर दूध व घी देते थे. लेकिन, लंपी के बाद अब पूरी तरह से वे गौसेवा में जुटे हुए हैं.

परिवार के सपोर्ट से शुरू की गौशाला

भानुप्रताप ने बताया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमएससी के बाद उन्होंने सोचा कि मुझे अपना ही कुछ काम करना है. मैंने पीएचडी के लिए दाखिला लिया लेकिन 6 महीने बाद ही मैंने वहां से ध्यान हटाकर गौ सेवा के लिए अपना मन बना लिया. हालांकि, जब मैंने यह काम शुरू किया तो मुझे इसके बारे में कुछ भी नहीं पता था. मैं यह तक नहीं जानता था कि गाय की नस्लें कितनी होती है और कहां-कहां की नस्ल होती है. लेकिन धीरे-धीरे मैंने इसकी जानकारी की और आज मेरे पास करीब अलग-अलग नस्ल के 100 छोटे बड़े गोवंश हैं.

भानु प्रताप ने बताया कि अभी मेरे पास गायों की नस्ल मे काक्रेज जालौर की, गिर गुजरात की, साहीवाल पंजाब की, राठी नस्ल राठ क्षेत्र की, थारपारकर नस्ल रेगिस्तान की, श्यामा ब्रज की औरचेलीस्थानी राठी जिसे पाकिस्तानी नस्ल माना जाता है. यह सभी अभी मेरे पास हैं. भानु प्रताप का कहना है कि अभी ऐसी कई नस्ले है जो मेरे पास नहीं है. जल्द ही में उन्हें यहां लाने का प्रयास करूंगा. कोरोनावायरस व लंपी वायरस के कारण मैं गाय लाने में असमर्थ रहा. लेकिन अब जल्द ही में अपने आश्रम में गायों की संख्या बढ़ाने की कोशिश करूंगा.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 19:30 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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