बस्ती के इस गांव को अंग्रेजों ने किया गैर चिरागी घोषित, जानिए बदहाली के पीछे का इतिहास

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कृष्ण गोपाल द्विवेदी/बस्ती. बस्ती जनपद के बहादुरपुर ब्लॉक में एक गांव है महुआ डाबर, जो 1857 तक कपड़ा व्यवसाय में अग्रणी था. यहां की 5000 आबादी काफी सम्पन्न थी. यह मात्र एक ऐसा गांव था जहां पर बहुतायत की संख्या में दो मंजिला मकान देखने को मिलता था. मनोरमा नदी के तट पर स्थित इस गांव में लोग नाव के जरिए व्यवसाय किया करते थे. लेकिन 3 जुलाई सन् 1857 इस गांव के लिए आफत बनकर टूटी जिसको भारतीय इतिहास में काले शब्दों में लिखा गया. जिसका नतीजा ये रहा की अंग्रेजों ने इस गांव को गैर चिरागी गांव घोषित कर दिया था और साफ़ हिदायत भी दी थी की यहां आग जलाना सख्त मना है. उसी का नतीजा रहा की 1857 के बाद से अब तक यह स्थान वीरान पड़ा है. हालांकि आस पास में गांव बसे है, लेकिन यह स्थल आज भी गैर चीरागी बना पड़ा है, यह स्थान आज भी विकास को तरस रहा है.
यह मामला 1857 के आजादी की क्रान्ति से जुड़ा हुआ है. 10 जून 1857 को अंग्रेजी सेना के आधे दर्जन अफसरों को महुआ डाबर निवासी महान क्रांतकारी पिरई खां ने घेर कर मार गिराया था. सार्जेंट बुशर नामक अंग्रेज अफसर घायल अवस्था में भाग निकला था और उसने पूरी घटना को अंग्रेजी सेना के उच्च अफसरों को बता दिया. जिसका नतीजा यह रहा की 3 जुलाई 1857 को बस्ती के तत्कालीन मैजिस्ट्रेट पेपे विलियम्स ने अपने घुड़सवार सैनिकों की मदद से महुआ डाबर गांव को चारों तरफ से घेर लिया और 5 हज़ार के आबादी वाले इस गांव को जलाकर राख कर दिया. यहां जमकर गोला बारी की गई और बचे लोगों को फांसी पर लटका दिया था.

नक्शे से हटाया गया महुआ डाबर का नाम
अंग्रेज अफसर पेपे ने इस गांव को गैर चिरागी गांव घोषित कर दिया और सख़्त हिदायत दी की आज के बाद इस स्थान पर ना तो चिराग चलेगा और न ही कोई निवास करेगा. पेपे विलियम्स ने साजिशन इस गांव को देश के नक्शे से ही हटा दिया और मूल महुआ डाबर से 50 किमी दूर बस्ती जनपद के गौर ब्लाक में एक दूसरा महुआ डाबर नाम का गांव बसा दिया था. जिसके लिए अंग्रेजी हुकूमत में पेपे विलियम्स को सम्मानित भी किया था.
आज तक नहीं हुआ विकास
स्थानीय नूर मोहम्मद ने बताया कि महुआ डाबर एक ऐतिहासिक जगह है. जिसने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके बावजूद महुआ डाबर आज भी अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. यहां पर आजतक न तो किसी शहीद का स्मारक बना और न ही कोई अन्य विकास हुआ है. ग्रामीण बताते हैं कि कई बार शासन प्रशासन से लेकर उच्च अधिकारियों से इस स्थान के विकास के लिए गुहार लगाई गई, बावजूद इसके कोई ठोस कदम नही उठाएं गए.

जिलाधिकारी बस्ती प्रियंका निरंजन ने बताया कि शासन के मंशानुरूप महुआ डाबर के विकास के लिए पर्यटन विभाग को निर्देशित कर दिया गया है. जल्द ही मेरे द्वारा इस पर्यटन स्थल का निरक्षण किया जाएगा.

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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 15:04 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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