यहां बोट के ​जरिए कराई जाती है चंबल नदी की सफारी, देखने को मिलते हैं मगरमच्छ, विदेशी पक्षियों का भी लगता है जमावड़ा

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शक्तिसिंह / कोटा. सवाई माधोपुर के पाली घाट में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य दूसरा पर्यटन स्थल बन चुका है. चंबल के एक तरफ राजस्थान का सवाई माधोपुर जिला और दूसरी तरफ मध्यप्रदेश का श्योपुर जिला है. इन दिनों यहां के पाली घाट में घड़ियालों का राज है. कई किलोमीटर तक चंबल नदी के किनारे पर पर्यटन को यहां घड़ियाल और मगरमच्छ आसानी से नजर आते हैं. यहां वैसे तो पर्यटक को मगरमच्छ और घड़ियाल की साइटिंग हो जाती है. लेकिन सर्दियों के दिनों में घंटों तक नदी के बाहर और नदी के किनारे घड़ियाल मगरमच्छ आसानी से दिख जाएंगे.

पाली घाट के लिए सवाई माधोपुर के रेलवे स्टेशन से टैक्सी या फिर बस के द्वारा यहां पहुंचा जा सकता है. यहां पर पर्यटक को 700 रुपए में चंबल सफारी वोट के द्वारा करवाई जाएगी, तकरीबन 1 घंटा जिसमें घड़ियाल और मगरमच्छ की अच्छी साइटिंग होती है. रूद्रप्रताप सिंह राजावत पर्यावरण प्रेमी ने बताया कि माधोपुर के टाइगर सेंचुरी के बाद पाली घाट चंबल घड़ियाल सेंचुरी भी पर्यटकों के लिए काफी पसंदीदा जगह बन चुकी है. यहां सैकड़ों की तादाद में पर्यटक मगरमच्छ और घड़ियाल और उनके बच्चों को देखने आते हैं. यहां पर्यटकों के लिए बोट की व्यवस्था है और यहां रुकने के लिए भी होटल है.

बन विभाग लगातार कर रहा मॉनिटरिंग

रुद्रप्रताप सिंह राजावत ने बताया कि घड़ियाल ने यहां कुछ समय पहले अंडे दिए थे. सैकड़ो अंडों में से अब बच्चे निकल रहे हैं. वर्तमान में घड़ियालों ने अंडे देने के लिए पाली घाट पर बजरी में 8 से 12 मीटर की दूरी पर गड्ढे खोदे हुए थे. घड़ियाल नदी के किनारे बने गड्ढों में बालू के अंदर अपने अंडे पकाते हैं. मां किनारे पर गड्ढे खोदती है, उनमें अंडे देती है और उन्हें बजरी से ढक देती है. अंडे को पकने में 60 से 80 दिन का समय लगता है, इस दौरान वह अपने अंडों की रखवाली करती है. फरवरी माह में 30 से 40 सेंटीमीटर गहरा गड्ढा खोदकर मादा घड़ियाल एक बार में 50 से 70 अंडे देती है. अंडे से बच्चे 60 से 80 दिन में बाहर आ जाते हैं. 60 दिन बीत जाने के बाद अंडों से छोटे-छोटे घड़ियाल निकलते है. वर्तमान में राष्ट्रीय चंबल मगरमच्छ अभयारण्य के पालीघाट और उसके आसपास के क्षेत्रों में 900 से अधिक मगरमच्छ रहते हैं. वर्तमान में इनकी संख्या करीब 940 है. ऐसे में छोटे घड़ियाल के जन्म से एक बार फिर चंबल में घड़ियाल के कुनबे में इजाफा होने की संभावना है.

पर्यावरण प्रेमी रुद्र प्रताप सिंह राजावत ने बताया कि घड़ियाल करीब 70 साल तक जीवित रहते हैं. यह मगरमच्छ जैसा जीव है, लेकिन अपनी कुछ विशेषताओं के साथ यह मगरमच्छ से होते है. अंडे से सुरक्षित निकल रहे मगरमच्छ के बच्चों का फॉरेस्ट विभाग का स्टाफ लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है. पाली घाट पर अब तक तकरीब 600 से 700 घड़ियाल के बच्चे पैदा हो चुके हैं. मई का महीना घड़ियालों के प्रजनन और नए घड़ियालों के पैदा होने का समय होता है. आमतौर पर मई-जून का महीना घड़ियालों के प्रजनन और नए घड़ियालों के जन्म का समय होता है.

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FIRST PUBLISHED : June 10, 2023, 11:20 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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