देश में पहली बार सुरंग में बनेगा रेलवे स्टेशन, रेल लाइन का 85% रास्ता टनल में, 3 घंटे का सफर 1 घंटे में पूरा

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हाइलाइट्स

इस रेल लाइन का निर्माण 2024 तक पूरा होने की उम्मीद.
इसके बन जाने से सिक्किम वृहद भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा.
इस रेल लाइन का अधिकांश हिस्सा पश्चिम बंगाल में होगा.

नई दिल्ली. भारतीय रेलवे पहली बार किसी सुरंग में स्टेशन बनाने जा रहा है. यह काम सिवोक-रंगपो रेलवे लाइन पर होगा. इस परियोजना का काम 2024 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी. यह रेलवे लाइन पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी को सिक्किम के रंगपो से जोड़ेगी. इस तरह सिक्किम भी 2024 तक राष्ट्रीय रेल नेटवर्क का हिस्सा हो जाएगा. इसकी कुल लंबाई 45 किलोमीटर होगी.

इस रेल लाइन में 14 सुरंगें और 22 पुल होंगे. इस ट्रैक की क्षमता 25 टन को संभालने की होगी और ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चल सकेंगी. अभी जिस दूरी को नापने में कार से कवर करने में 3 घंटे का समय लग जाता है. इस रेल लाइन के बन जाने के बाद बस 1 घंटे में सफर पूरा हो सकेगा. इसका निर्माण इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन (इरकॉन) इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है. यह एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है. इस प्रोजेक्ट के निदेशक इरकॉन अधिकारी मोहिंदर सिंह ने हाल ही में बताया था कि इस लाइन का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि गंगटोक तक लाइन का विस्तार करने की भी योजना है, लेकिन इसे बाद में किया जाएगा.

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50 फीसदी काम पूरा
उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर इस प्रोजेक्ट का 50 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है. सिंह ने कहा कि “यह सामरिक महत्व के साथ-साथ आर्थिक महत्व का बुनियादी ढांचा है.” उन्होंने बताया कि सिवोक और रंगपो के बीच तीन स्टेशन होंगे जिनके नाम- रियांग, तीस्ता और मेली हैं. बकौल सिंह, “तीस्ता स्टेशन भूमिगत होगा.” उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे द्वारा पहली बार भूमिगत रेलवे स्टेशन बनाया जा रहा है. इस रूट पर मालगाड़ी और यात्री दोनों ट्रेनें चलाई जाएंगी. इरकॉन के एक दस्तावेज के मुताबिक, 45 किलोमीटर लंबी रेल लाइन में 86 फीसदी या 38.62 किलोमीटर सुरंगें हैं. सिंह ने कहा था, “यह न केवल राष्ट्रीय और सामरिक महत्व की परियोजना है बल्कि एक तकनीकी और इंजीनियरिंग चमत्कार है.”

सामरिक महत्व
दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा ने कहा है कि सिक्किम और बंगाल का उत्तरी हिस्सा 4 देशों के साथ सीमा साझा करते हैं. चीन, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान, इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा चिकेन नेक (सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण) कहलाता है. यह एक बेहद संवेदनशीन इलाका है. उन्होंने कहा, “यह (रेल लाइन) न केवल पर्यटन के लिए मशहूर इस क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत जरूरी मदद मुहैया कराएगा कराएगी क्योंकि सेनाओं के लिए आना-जाना आसान हो जाएगा.”

Tags: Business news in hindi, Indian railway, Rail line, Railway

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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