शानदार गद्यकार और कवि थे मंगलेश डबराल, ‘रमोला चक्रवर्ती’ और ‘मयंक नाम’ से भी किया लेखन

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(विमल कुमार/ Vimal Kumar)

हिंदी के अप्रतिम कवि गद्यकार और अनुवादक मंगलेश डबराल ने ‘हिंदी पेट्रियट’ से 1969 में अपनी पत्रकारिता शुरू की थी और ‘शुक्रवार’ के संपादक के रूप में उनकी पत्रकारिता का अंतिम पड़ाव था. मंगलेश डबराल बीए पास नहीं थे और अवजीविका के लिए देहरादून से दिल्ली आए थे.

मंगलेश डबराल ने दिल्ली में काम-धंधे की खोज में काफी खाक छानी. ‘हिंदी पेट्रियट’ के बाद ‘आसपास’ और ‘प्रतिपक्ष’ पत्रिकाओं में काम किया. फिर वे भोपाल में ‘पूर्वग्रह’ में काम करने लगे और उसके बाद इलाहाबाद में ‘अमृत प्रभात’ में अपनी सेवाएं दीं. डबराल कुछ समय लखनऊ में भी रहे फिर दिल्ली से ‘जनसत्ता’ जब शुरू हुआ तो वे साहित्य संपादक बन कर दिल्ली आ गए.

मंगलेश डबराल की स्मृति में पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के प्रेस क्लब में एक समारोह का आयोजन किया गया जिसमें उनको याद किया गया. कई समकालीन कविता के हस्ताक्षर और युवा कवियों ने डबराल को याद करते हुए उनकी कविताओं का पाठ किया और अपनी रचनाएं सुनाईं.

मंगलेश डबराल के सबसे निकटतम और पुराने मित्र प्रभाती नौटियाल ने उन्हें याद करते हुए उस पूरे दौर को रेखांकित किया जिसमें उनके सभी मित्रों ने फाके और मस्ती के दिन बिताए और लंबा संघर्ष किया. सभी ने मिलकर सामाजिक बदलाव के लिए भी लड़ाई लड़ी. प्रभाती नौटियाल ने बताया कि मंगलेश उनके स्कूली मित्र थे और उन्होंने डबराल का परिचय लीलाधर जगूड़ी से कराया था. जगूड़ी ने ही मंगलेश जी को समकालीन कविता से जोड़ा.

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मंगलेश डबराल की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम का एक दृश्य.

प्रभाती नौटियाल ने उस दौर में मंगलेश, दिनेश जोशी, अजय सिंह, आनंद स्वरूप वर्मा, गिरधर राठी, असद जैदी, इब्बार रब्बी और प्रमोद जोशी के साथ बिताए गए दिनों को याद किया. उन्होंने बताया कि मंगलेश ने ‘रोमोला चक्रवर्ती’ के नाम से भी शुरू में लिखा था. उन्होंने कहा कि वे दिन मंगलेश जी के ही नहीं हम सबके संघर्ष भरे दिन थे और सभी की आंखों में क्रांतिकारी सपने थे. समाज को बदलने की एक गहरी तड़प थी.

प्रसिद्ध कवि विष्णु नागर ने कहा कि मंगलेश डबराल न केवल बेहतर कवि बल्कि श्रेष्ठ अनुवादक भी थे. वे संगीत तथा फिल्मों के गहरे जानकार भी थे. नागर ने मंगलेश डबराल द्वारा एरनस्तो कार्डोंनेल की कविताओं के अनुवाद का भी पाठ किया.

इब्बार रब्बी ने बताया कि मंगलेश डबराल का पहला लेख ‘ताजमहल’ पर छपा था और वह बहुत ही शानदार लेख था. डबराल का यह लेख ‘युगवाणी पत्रिका’ में छपा था. मंगलेश ने ‘मयंक’ नाम से भी लेखन किया था.

प्रेस क्लब के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेड़ा ने बताया कि किस तरह मंगलेश डबराल ने उनकी रिपोर्ट आदि छापकर उन्हें प्रोत्साहित किया. ‘वसुधा’ के संपादक विनीत तिवारी ने भी मंगलेश जी की इंदौर यात्रा के किस्से सुनाए और उनकी कविता का पाठ किया.

गिरिधर राठी ने इस अवसर पर प्रख्यात समाजवादी सुरेंद्र मोहन की एक मौज़ू कविता का पाठ किया और प्रतिपक्ष के दिनों को याद किया जब मंगलेश जी और असद ज़ैदी उनके साथ काम करते थे.

एक जमाना था जब मंगलेश डबराल जनसत्ता के रविवारीय पृष्ठ के संपादक थे तो उनसे मिलने वालों की भीड़ लगी रहती थी. कई युवा कवि और कवयित्रियां उनसे मिलने आती थीं. कई वरिष्ठ लेखक आते थे. कई लोग तो उनके केबिन में बैठे ही रहते थे लेकिन आज जब मंगलेश डबराल की स्मृति में प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम का आयोजन किया तो मुश्किल से 30 लोग आए. कई लोगों वादा करके भी नहीं आए. इससे पता चलता है कि किसी के निधन के बाद कोई अपने प्रिय लेखक को याद नहीं करना चाहता है और यह हमने अज्ञेय के साथ भी होते देखा है. जब वह जीवित थे तो लेखकों की भीड़ उन्हें घेरे रहती थी लेकिन उनके निधन के बाद भी उन्हें याद करने वाला कोई नजर नहीं आया. अगर ओम थानवी, अशोक बाजपेई नहीं होते तो उनकी जन्मशती पर देश भर में कार्यक्रम आयोजित नहीं होते. आज रामविलास शर्मा की स्मृति में कोई कार्यक्रम नहीं होता है और ना ही नहीं सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की स्मृति में. कुछ साल पहले नामवर सिंह जी गुजर गए लेकिन उनकी स्मृति में भी दिल्ली में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं होता है.

मंगलेश डबराल के कार्यक्रम में किसी भी लेखक संगठन का कोई व्यक्ति नहीं आया. न विश्वविद्यालय की दुनिया का कोई व्यक्ति. मंगलेश जी के करीबी मित्र प्रभाती नौटियाल, इब्बार रब्बी, गिरधर राठी, विष्णु नागर जरूर आए और सबसे बड़ी बात कि मंगलेश डबराल की पत्नी संयोगिता जी  और उनकी बेटी अलमा उस कार्यक्रम में मौजूद थीं. ‘उदभावना’ के संपादक अजेय कुमार, प्रसिद्ध कहानीकार योगेंद्र आहूजा, चर्चित नाटककार राजेश कुमार, चर्चित कवि संजय कुंदन, पत्रकार और लेखक अवधेश श्रीवास्तव, राकेश रेणु, रविन्द्र त्रिपाठी, मनोज मोहन, विनीत तिवारी, सुरेश नौटियाल, मीनाक्षी प्रसाद, प्रोफेसर हर्ष बाला शर्मा, कंचन जयसवाल और शालिनी कपूर मौजूद थीं. कार्यक्रम में कई कवियों ने मंगलेश जी की कविताओं का पाठ किया और कुछ कवियों ने अपनी कविताओं का पाठ किया. मंच का संचालन रवींद्र त्रिपाठी ने किया.

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Author: Up Head Line

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