
हाइलाइट्स
जब भारत में अगली जनगणना होगी, तो आप घर बैठे एक पोर्टल पर प्रश्नावली भरेंगे.
नागरिक अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी देख और अपडेट कर पाएंगे.
डिजिटल जनगणना से जल्दी भरोसमंद और गुणवत्ता पूर्ण डेटा उपलब्ध हो सकेगा.
नई दिल्ली: जब भारत में अगली जनगणना होगी, तो आप घर बैठे इंटरनेट के जरिए एक पोर्टल पर एक प्रश्नावली भरेंगे और गणना करने वाला आपके भरे हुए फार्म को अपने मोबाइल के जरिए डिजिटली भारत के रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय (ORGI) भेज देगा. इस बात की पूरी संभावना है कि इस तरह अगली जनगणना के आंकड़े बेहद जल्दी जारी किए जा सकेंगे.
यह प्रक्रिया गणना करने वालों की घर घर जाकर लंबे फार्म भरने की पारंपरिक छवि से बिल्कुल अलग होगी. न्यूज 18 को मिली विस्तृत जानकारी बताती है कि यह भारत की सही मायने में पहली डिजिटल जनगणना होगी जो अगली जनगणना में आमूलचूल परिवर्तन ला देगी. इसमें लोगों को इंटरनेट के माध्यम से घर से ही जनगणना प्रश्नावली भरने में सक्षम बनाया जाएगा. तकनीकी रूप से सशक्त गणना करने वाले इस डेटा को अपने मोबाइल के ज़रिए तुरंत रजिस्ट्रार कार्यालय में भेज देंगे.
यह प्रक्रिया पहले से कई गुना तेजी से जनगणना के आंकड़ों को एकत्र करके उपलब्ध कराने में सक्षम होगी, और सरकार को अपनी नीति निर्माण के लिए नवीनतम डेटा बेहद जल्दी मिल सकेगा.
डिजिटल जनगणना
जनगणना की प्रक्रिया 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड की वजह से इसमें देर हो गई. अब जल्दी ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जिसके तहत देश भर के करीब 33 करोड़ परिवारों की अनुमानित 136 करोड़ आबादी का डेटा एकत्र किया जाएगा.
पूर्व में, इतनी बड़ी मात्रा में क्षेत्र से एकत्र किए गए डेटा का डिजिटलीकरण एक विशाल और संसाधन खपाने वाला कार्य था. इस वजह से लगभग एक दशक तक इसकी प्रक्रिया और परिणामों के प्रसार में काफी देर लग जाती थी. सरकार को लग रहा था कि इस वजह से त्वरित योजना और नीति निर्माण में डेटा की जो उल्लेखनीय भूमिका होती है वह घट जाती है. इसी के चलते भारत की पहली डिजिटल जनगणना की योजना तैयार हुई, जो जनता को इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाकर उनके हाथों में ताकत देने का अवसर प्रदान करेगी.
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100 फीसद डिजिटल जनगणना संभव
नागरिक इसके जरिये अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी बदलने, नए सदस्यों को जोड़ने और अपने परिवार के किसी सदस्य के चले जाने या मृत्यु होने की जानकारी देने में सक्षम होंगे. यह सब कुछ एक पोर्टल पर ऑनलाइन होगा. इस डेटा को सामाजिक-आर्थिक स्थिति के 35 मापक पैमानों पर सत्यापित और ऑडिट किया जाएगा. लेकिन फिलहाल भारत की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से 100 फीसद डिजिटल जनगणना संभव नहीं हो सकती है. सरकार डेटा एकत्र करने के लिए अलग-अलग तरीके अपना सकती है. एक जिसमें गणना करने वाले अपने स्मार्टफोन में जनगणना मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल करेंगे और दूसरा पारंपरिक तरीका, यह वहां अपनाया जाएगा जहां इंटरनेट की उपलब्धता नहीं है. तो वहां पेपर का इस्तेमाल करके उसमें डेटा भरा जाएगा.
सरकार को कैसे मदद मिलेगी
सरकार को लगता है कि डिजिटल जनगणना के जरिए साक्ष्य आधारित नीतिनिर्माण के लिए जल्दी भरोसमंद और गुणवत्ता पूर्ण डेटा उपलब्ध हो सकेगा, जिससे योजना निर्माण, कल्याणकारी योजना को लागू किए जाने, लाभार्थियों और ऐसे समूह जिन्हें ध्यान में रख कर योजना तैयार की गई है उन तक लाभ जल्दी से जल्दी पहुंच सकेगा.
इस प्रक्रिया में लोगों को बगैर गणना करने वालों की सहायता के खासतौर पर तैयार किए गए स्व गणना वेबपोर्टल के माध्यम से जनगणना डाटा भरने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. इस तरह से नागरिक अपने परिवार के सदस्यों की जानकारी देख और अपडेट कर पाएंगे. डेटा प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटाइज किया जाएगा.
इस पोर्टल में जनगणना की सूचना भरने वाले परिवार की जानकारी तक सुरक्षित और नियंत्रित पहुंच, पंजीकृत नंबर पर ओटीपी भेजना और ओटीपी डालने के बाद उपलब्ध पहले से भरी जानकारी के आधार पर प्रमाणीकरण शामिल है. सरकार ने 2022 में जनगणना के नियमों को स्व गणना और इस मुद्दे पर मुकदमेबाजी से बचने के लिए बदल दिया है.
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Tags: Census, Digital India, Population
FIRST PUBLISHED : May 24, 2023, 10:36 IST








