
जुगल कलाल/ डूंगरपुर. आज के जमाने में भूत प्रेतों पर कौन विश्वास करता है. पढ़े-लिखे लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं, जबकि कुछ लोगाें की इनमें बहुत श्रद्धा होती है. हालांकि, भूतों से जुड़ी कई कहानियां भी हम सभी ने सुनी हैं, लेकिन कौन जानता है कि इसमें सच्चाई है या ये सिर्फ लोगों के दिमाग की उपज है. डूंगरपुर में एक मंदिर है विजवा माता का मंदिर जहा झाड़ फूंक कर भूत भगाया जाता है. इस मंदिर में झाड़ फूंक कर भूत भगाने वालों के पास खूब भीड़ रहती है. मंदिर को लेकर लोगों का मानना है कि जिन लोगों पर भूत पिशाच का साया रहता है, उन्हें यहां लाने से यह साया उतर जाता है.
डूंगरपुर शहर के गैपसागर की पाल है विजवा माता का मंदिर जो की डूंगरपुर में प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. जिन लोगाें पर ऊपरी हवा रहती है, ऐसे भक्त यहां आते हैं मान्यता है कि यहां आकर दुष्ट आत्मा, भूत-पिशाच से छुटकारा मिल जाता है. इसके अलावा मान्यता है कि इस देवी की मन्नत लेने पर अपंगता दूर हो जाती है और रोगों का नाश हो जाता है. विजवा माता को अंबा स्वरूपा भी माना जाता है. इसकी प्रसिद्धि इतनी है कि यहां न सिर्फ स्थानीय बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु मन्नत लेने आते हैं. वैसे तो इस देवी को भूत प्रेत के साथ सभी रोग मिटाने वाली माना जाता है लेकिन मुख्य रूप से भूत, प्रेत, लकवा और हाथ-पैर के दर्द और रोगों के बीमार श्रद्धालु बड़ी तादाद में आते हैं.
विजवा माता में मंदिर में प्रवेश करने यज्ञ कुंड बना हुआ है. इसी के पास से ही एक पेड़ है जहां श्रद्धालु पूरा चक्कर काटने के बाद विजया माता की मूर्ती के पास पहुंचते है. वहां पर एक पण्डित हाथों में मोर के पंखों से बना झाड़ू लेकर बैठा रहता है और श्रद्धालु झाड़ फूंक करता है. झाड़ फूंक के बाद ताबे के लोटे से लोगों पानी से बना प्रसाद दिया जाता है. वहीं, आगे चलकर दो से तीन लोगो बैठे हुए रहते है. जो कि मंदिर आए श्रद्धालु के हाथों में नव रंगी धागा बनाते है जिसे कि लोगों बुरी आत्मा और रोग से बचाया जा सके. इस मंदिर की एक ओर विशेषता है कि आमतौर पर मंदिरों में पूजारी ब्राह्मण समाज से देखने मिलते है. लेकिन, इस मंदिर पुजारी आदिवासी है और मंदिर देखभाल भी यहीं लोगों करते है.
नोट – यह लोगों कि मान्यताओं पर आधारित खबर है.न्यूज 18 इन दावों की पुष्टि नहीं करता है.
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FIRST PUBLISHED : May 16, 2023, 13:44 IST








