Kannauj News: कन्नौज तय करेगा अगरवुड तेल का मानक, 80 लाख रुपए प्रति लीटर है कीमत

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

अंजली शर्मा/कन्नौज. इत्र और इतिहास की नगरी कन्नौज को एक और बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है. दुनिया के सबसे महंगे तेल अगरवुड के मानक को आने वाले समय में कन्नौज तय करेगा. कन्नौज में बने एफएफडीसी को इसकी टेस्टिंग की जिम्मेदारी मिली है. इस प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद सरकार की तरफ से एफएफडीसी को इसका भुगतान भी कर दिया गया है.

दरअसल, अगरवुड की खेती सुगन्धित लकड़ी के लिए की जाती है, इसे गॉड ऑफ वुड भी कहते हैं. इसका रासायनिक नाम एक्विलरिया है. अगरवुड पूर्व, दक्षिण एशिया मूल का पौधा है. विश्व में अगरवुड के पेड़ों का उत्पादन भारत, चीन, वियतनाम, मलाया, बांग्लादेश, कंबोडिया, म्यांमार, भूटान, लाओस, मलक्का, सिंगापुर और जावा देशो में किया जाता है.

यह एक्विलरिया की एक संक्रमित लकड़ी है, जिसका पूर्ण विकसित वृक्ष 40 मीटर लम्बा और 80 सेंटीमीटर तक चौड़ा होता है. यह एक जंगली पेड़ है, जो कुछ विशेष परजीवी कवक या सांचो से संक्रमित होकर विकसित होता है. यह फियालोफोरा पैरासिटिका कहलाता है. इस संक्रमण से अप्रभावित पौधा प्रतिक्रिया कर हर्टवुड से अगरवुड में परिवर्तित हो जाता है. यह पूरी तरह से गंधहीन पूर्ण संक्रमण होता है, जो समय के साथ अधिक संक्रमित होकर गहरे रंग का राल उत्पन्न करता है.

आपके शहर से (कन्नौज)

उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने दी जिम्मेदारी

चंदन अगरबत्ती के मानक तय करने के बाद एफएफडीसी को नई जिम्मेदारी मिली है. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से एफेसडीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. शक्ति विनय शुक्ला से अगरवुड तेल इत्र और इसके मानक बनाने पर चर्चा करके उनके मानक तय करने का जिम्मा कन्नौज के एफएफडीसी को मिला है.

जल्द शुरू होगा काम

मार्च 2022 को त्रिपुरा सरकार की ओर से इसके मानक को तय करने के लिए जो बजट आवंटित हुआ था, उस बजट को पास करके उसका पैसा भेज दिया गया है. जैसे ही वहां से अगरवुड तेल आता है. उसके मानक तय करने का काम शुरू कर दिया जाएगा.

70 से 80 लाख रुपए प्रति लीटर है कीमत

बेशकीमती होने के चलते इसको भगवान की लकड़ी भी कहा जाता है. इसका तेल इतना महंगा होता है, कि इसको लिक्विड गोल्ड भी कहा जाता है. इसकी कीमत 70 से 80 लाख रुपए लीटर तक की होती है. इसका इस्तेमाल इत्र बनाने में होता है. अगरवुड का तेल बनाने के लिए इस पेड़ की छाल को उधेड़ दिया जाता है, उसमें फफूंद लगने के साथ ही एक खास किस्म की रार या गोंद होती है.

Tags: Kannauj news, Latest hindi news, UP news

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें