विवाह में मंडप का खास महत्व, लेकिन बैद्यनाथ मंदिर में बिना मंडप के होती है शादी, जानें वजह

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पमजीत कुमार/देवघर. इन दिनों शादी-विवाह का सीजन चल रहा है. सभी जगहों पर स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रस्मों को निभाया जाता है. हिन्दू धर्म में शादी समारोह में मंडप बनाया जाता है. विवाह में इस मंडप का विशेष महत्व है. दूल्हा और दुल्हन इस मंडप में सात फेरे लेते हैं जिसके बाद शादी संपन्न होती है. मंडप चार स्तंभ को जोड़ कर बनाया जाता है. मान्यता है कि यह चारो स्तंभ ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ ओर संन्यास के प्रतीक होते हैं. झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी शादी-विवाह आयोजित होते हैं, लेकिन यहां संपन्न होने वाले शादी में मंडप नहीं बनाया जाता है.

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने न्यूज़ 18 लोकल से बताया कि मंडप में शादी करने की मान्यता है. इसे मंदिर के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है. मंडप के द्वारा विवाह स्थल को एक तीर्थस्थल में परिवर्तित किया जाता है. मंडप में सबसे पहले गौरी गणेश की पूजा की जाती है. फिर कुल देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. इसके बाद घी ढारी (उड़ेली) की जाती है.

बता दें कि, बैद्यनाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध तीर्थस्थल है. यहां का प्रांगण पहले से पवित्र है. मान्यता है कि मंदिर में शादी करने से अनंत गुना लाभ की प्राप्ति होती है. यहां पहले से ही देवी-देवता विराजमान हैं. उन्हें मंडप बना कर बुलाने की आवश्यकता नहीं है. इसलिए बैद्यनाथ मंदिर में शादी करने के लिए मंडप की जरूरत नहीं पड़ती है. यहां बिना मंडप के ही शादी संपन्न होती है.

मंडप बनाते समय इन चीजों का रखें ख्याल

दरअसल, विवाह मंडप का निर्माण बांस और सरपत से किया जाता है. इसके पीछे कारण है कि बांस और सरपत को वृद्धि का द्योतक माना जाता है. इसका नाश नहीं होता, जब तक कि नाश न किया जाए. मंडप के बीच में हरीश रखने की परंपरा है. हरीश उन्नति का द्योतक माना जाता है. संवर्धन का आधार खेती को माना गया है. हरीश के साथ केले के पत्ते अनिवार्य रूप से लगाए जाते हैं, क्योंकि केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है.

(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. न्यूज़ 18 लोकल किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है)

Tags: Deoghar news, Jharkhand news, Marriage, Shaadi

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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