
अनुज गौतम/सागर. छोटी-छोटी बेटियों की पढ़ाई लिखाई अच्छे से हो जाए. उनके रहन-सहन और खाने-पीने में कोई परेशानी न आए, इसके लिए एक मां ने जेल में सजा काटते हुए अपनी रातों की नींद कुर्बान कर दी है. वह अंधेरी रातों में इसलिए जगती है, ताकि उसकी बेटियों के भविष्य में उजियारा हो जाए.
दरअसल सागर की केंद्रीय जेल में एक महिला पिछले 12 साल से हत्या के जुर्म में सजा काट रही है. पति को अब न तो उससे और न ही उसकी बेटियों से मतलब रह गया है, लेकिन मां तो मां होती है. वह जहां भी रहे जैसे भी रहे, उसे अपने बच्चों की चिंता हमेशा सताती है. यूपी के ललितपुर जिले की उर्मिला की शादी 16 साल पहले सागर जिले के बीना श्यामपुरा में रहने वाले कैलाश रजक के साथ हुई थी. इनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था. 3 साल में उर्मिला की कोख से दो नन्हीं किलकारियां गूंजीं.
समय के साथ बेटियां बढ़ने लगीं. उन्होंने चलना सीखा ही था कि उर्मिला एक ऐसे कुचक्र में फंसी कि उसे 302 के मामले में जेल भेज दिया गया. इधर उर्मिला को जेल हुई, उधर पति सहित परिवार ने उसकी मासूम बेटियों को अकेला छोड़ दिया. जैसे तैसे करके अपनी मासूम लाडलियों को अपने मायके यानी कि नाना-नानी के घर भिजवा दिया. लेकिन बुजुर्ग अवस्था होने की वजह से उनकी भी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. इसलिए पैसा कमाना जरूरी था.
इसके बाद वह जेल में ही गेहूं बीनने का काम करने लगी. फिर पापड़ बनाना सीख लिया तो पापड़ बनाने लगी. अब पिछले कुछ महीनों से जेल सेवा में उसकी ड्यूटी लगा दी गई है, जिसके तहत वह नाइट वॉचमैन की ड्यूटी निभाती है. इससे जो पैसा आता है उसे जब बेटियां मुलाकात के लिए आती हैं तो उन्हें दे देती है, ताकि वे अपनी सीमित जरूरतों को पूरा कर सकें.
जेलर गीता राठौर ने बताया कि जेल में 78 महिला बंदी हैं. एनजीओ के माध्यम से अलग-अलग काम भी बांटे गए हैं, जिसमें चुनाई, कढ़ाई, सिलाई, बुनाई जैसे अलग-अलग कई कार्य करवाए जाते हैं और फिर इनका जो मेहनताना होता है, वह इन्हें दिया जाता है, फिर ये जैसे चाहें उस माध्यम से अपने घर भिजवा देती हैं.
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Tags: Jail story, Mothers Day Special, Sagar news
FIRST PUBLISHED : May 14, 2023, 13:40 IST









