ए0एस0एम0सी0 कौशाम्बी में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर सेमीनार एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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कौशाम्बी—

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय कौशाम्बी में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे के उपलक्ष्य पर एक सेमीनार एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया इसका मुख्य उद्देश्य लोगो में वायरल हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता एवं उससे बचाव के उपाए के बारे में बताया गया कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रधानाचार्य डा0 हरिओम कुमार सिंह के द्वारा किया गया एवं बताया कि वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे का उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत को हेपेटाइटिस मुक्त बनाना है और यह रोग लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर एवं लिवर कैंसर का प्रमुख कारण है। विश्व स्तर पर करोड़ों लोग हेपेटाइटिस बी एवं सी से संक्रमित हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं होती। इस बीमारी की रोकथाम के लिए समय पर हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण, सुरक्षित रक्त, सुरक्षित इंजेक्शन, स्वच्छता, संक्रमित रक्त एवं शरीर के द्रवों से बचाव तथा समय पर जांच एवं उपचार अत्यंत आवश्यक हैं। उनका वायरल लोड परीक्षण और आवश्यक दवाएं भी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में निःशुल्क प्रदान की जा रही है। मेडिसिन विभाग में कार्यरत डा0 सुरभि प्रकाश ने बताया कि हेपेटाइटिस बी एवं सी का समय पर निदान और उचित उपचार संभव है। यदि रोग की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए और मरीज चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित रूप से एंटीवायरल दवाओं का सेवन करे, तो लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर एवं लिवर कैंसर जैसी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि पीलिया, लंबे समय तक थकान, भूख कम लगना या लिवर संबंधी किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें तथा तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेकर जांच कराएं। पैथोलॉजी विभाग के सह आचार्य डा0 रविरंजन सिंह ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस मुख्यतः पाँच प्रकार के होते है हेपेटाइटिस- ए0, बी0,सी0,डी0,ई0 इनमें हेपेटाइटिस ए0 एवं ई0 फीको ओरल और संक्रमित पानी के सेवन से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस बी0,सी0 एवं डी0 संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन, संक्रमित सुई, असुरक्षित यौन संपर्क तथा संक्रमित मां से नवजात शिशु में फैल सकते हैं।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सह आचार्य डा0 अरिन्दम चक्रवर्ती ने बताया कि हेपेटाइटिस बी एवं सी की जांच के लिए रैपिड टेस्ट एवं एलाइजा विधि से परीक्षण किया जाता है। चिकित्सा महाविद्यालय के बीएसएल लैब-2 में मालिक्यूलर सुविधा उपलब्ध होने से संक्रमण रोगो की जांच अधिक तेज, सटीक और विश्वसनीय हो जाती है। इन जांचों के माध्यम से संक्रमण की पहचान कर मरीजों को समय पर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार कराने में सहायता मिलती है।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डा0 सन्तोष कुमार ने बताया कि वायरल हेपेटाइटिस विश्व की प्रमुख जनस्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। विश्वभर में लगभग 28.7 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित हैं, प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु होती है तथा 18 लाख नए संक्रमण सामने आते हैं। भारत भी हेपेटाइटिस के अधिक बोझ वाले देशों में शामिल है। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत हेपेटाइटिस बी एवं सी की निःशुल्क जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण इस रोग की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है। नवजात शिशु को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका तथा राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार आगे की खुराक दी जाती है।
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा0 पंकज कुमार तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक डा0 विश्व प्रकाश, उपप्रधानाचार्य डा0 सौरभ कृष्ण मिश्र, डा0 राकेश कुमार शुक्ला, डा0 ए0के सिंह, डा0 विकास कुमार, डा0 संजीव कुमार सिंह, डा0 नन्दनी राधव, डा0 अभिषेक भाष्कर डा0 अरूण पाण्डेय, डा0 अंकित तिवारी, डा0 प्रतिमा त्रिपाठी, डा0 शुऐव सिद्वकी क्वालिटी मैनेजर एवं अन्य चिकित्साधिकारी एवं वार्ड इन्चार्ज मौजूद रहे।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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