
रामकुमार नायक/महासमुंद: आज गुप्त नवरात्रि का आखिरी दिन है. आषाढ़ मास की नवमी तिथि को भड़ली नवमी भी कहा जाता है, जो अपने आप में अबूझ मुहूर्त है. इस दिन बिना मुहूर्त देखे हर तरह के मांगलिक और शुभ काम करने की परंपरा है.
आषाढ़ मास में मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन आखिरी शुभ मुहूर्त माना जाता है, क्योंकि इसके दो दिन बाद देवशयनी एकादशी होती है. इस तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, जिससे अगले चार महीनों तक मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं होते.
नवमी के दो बाद सो जाते हैं श्रीहरि
भड़ली नवमी को लेकर पं. मनोज शुक्ला ने बताया कि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि से नवमी तक गुप्त नवरात्रि पर्व माना जाता है. यह पर्व सिद्धि साधना आराधना पूजन के लिए शुभ माना जाता है. इसके अलावा नवमी तिथि जिस दिन गुप्त नवरात्रि समाप्त होती है, उसके ठीक दो दिन बाद देवशयनी एकादशी मनाई जाती है. इस दिन से चार माह के लिए चौमासा प्रारंभ हो जाता है. जिस दिन से सभी मांगलिक कार्य और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं.
पूरा दिन ही शुभ
चौमासा के दो दिन पहले यानी नवमी तिथि को बहुत शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन गुप्त नवरात्रि पर्व का समापन होता है. कोई भी नवरात्रि पर्व के नवमी तिथि बहुत शुभ होती है. सम्पूर्ण नवरात्रि पर्व से अधिक लाभदायक और फलदायक होती है, इसलिए इस दिन कोई भी मांगलिक कार्य या शुभ कार्य करते हैं. उसके लिए शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है. यह दिन ही शुभ होता है.
(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 20:18 IST





