द्रौपदी कूप; यही है वह स्थान…जहां पांचाली ने धोए थे दुशासन के खून से रंगे बाल!

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अशोक यादव/कुरुक्षेत्र: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में महाभारत के हजारों साल बाद भी महा युद्ध की कई निशानियां आज भी मौजूद हैं. ज्योतिसर और ब्रह्मसरोवर के आसपास कई प्राचीन मंदिर हैं. इन्हीं में से एक है द्रौपदी कूप. यह प्राचीन मंदिर द्रौपदी की कहानी आज भी  बताता है. इसी मंदिर के अंदर एक कुआं है, जिसे द्रौपदी कूप कहते हैं.

बताया जाता है कि द्रौपदी रोजाना इसी कुएं के जल से स्नान करती थी. महाभारत युद्ध में भीम द्वारा दुशासन को मारने के बाद द्रौपदी ने अपने खुले केश दुशासन के खून से रंगे थे और प्रतिज्ञा पूरी की थी. इसके बाद द्रौपदी ने अपने खुले केशों को इसी कूप में आकर धोया था. यही कारण है कि यह स्थान वर्तमान में द्रौपदी कूप के नाम से जाना जाता है.

बर्बरीक का मंदिर
यहां महाभारत युद्ध में निर्णायक की भूमिका निभाने को आतुर रहे बर्बरीक का मंदिर भी है. बताया गया कि यह वही स्थान है, जो महाभारत काल से पहले का है. यहां पर भीम पुत्र घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जहां लोग पूजा करते हैं. मान्यता के अनुसार, बर्बरीक के पास ऐसी धनुर्विद्या थी, जिससे वह किसी भी सेना को अकेले ही जीत सकता था. तब श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को वचनों में बांध कर उसका सिर मांग लिया था, लेकिन बर्बरीक ने कहा कि वह तो महाभारत का युद्ध देखना चाहता था.

इसलिए बर्बरीक की होती है पूजा
कथा के अनुसार, तब श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम महाभारत का पूरा युद्ध जरूर देख सकोगे. तुमने मुझे सम्मान स्वरूप अपना शीश भेंट किया है, इसलिए कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर कलयुग में तुम्हारी भी पूजा होगी. यही कारण है कि आज भी श्रद्धालु जब द्रौपदी कूप को देखने आते हैं तो बर्बरीक की पूजा जरूर करते हैं. मंदिर के पुजारी का कहना है कि बर्बरीक को ही आज खाटू श्याम के नाम से जाना जाता है.

प्राचीन कुआं भी है
कुरुक्षेत्र में महाभारत काल का प्राचीन कुआं आज भी देखा जा सकता है. माना जाता है कि इसी स्थान पर महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य ने चक्रव्यूह की रचना की थी और कर्ण ने यहीं पर अभिमन्यु को धोखे से मारा था, जिससे वह वीरगति को प्राप्त हुआ था. इसके बाद भीम ने इस कुएं का निर्माण किया, जहां द्रौपदी ने स्नान कर अभिमन्यु की मृत्यु का बदला लेने की शपथ अर्जुन को दिलाई थी.

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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