Success Story: 1500 से शुरू किया डिब्बा बिजनेस, आज ढाई करोड़ की कंपनी की मालकिन, साइकिल से खोजती थीं ऑर्डर

रजत भट्ट/गोरखपुर. गोरखपुर की संगीता पांडे की स्टोरी बहुत खास है, कभी एक रुपए के लिए सोचना पड़ता था और घर में सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं थी. फिर भी खुद से लड़ाई लड़ संगीता ने अपने आप को ऐसी जगह पहुंचाया, जहां आज उनकी हर तरफ तारीफ ही होती है. एक महिला होने के नाते सामने कड़ी चुनौती और परीक्षा होती है, लेकिन संगीता ने इन सभी से लड़ते हुए खुद की एक कंपनी बना दी और लोगों को रोजगार दिया.

गोरखपुर की संगीता पांडे की कहानी बिल्कुल अलग है, कभी जेब में पैसे नहीं तो पूरा परिवार तंगी से जूझता था. लेकिन आज संगीता का परिवार और संगीता बहुत खुश है. इस बिजनेस को लेकर जब संगीता से हमारी बात हुई तो उन्होंने बताया कि उनकी पढ़ाई गोरखपुर विश्वविद्यालय से हुई. 19 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई. शादी के बाद उनके पति का गोरखपुर ट्रांसफर हो गया, पति उनके पुलिस विभाग में है. घर की जिम्मेदारियां बढ़ने लगीं तो संगीता ने भी कमाने की सोची. साइकिल से मेहनत करके काम ढूंढा लेकिन नहीं मिला, फिर 1500 रुपए से पैकिंग का काम शुरू कर दिया.

साइकिल से खोजती थी ऑर्डर

पैकिंग का काम शुरू करने के बाद संगीता ने उसका नाम सिद्धिविनायक पैकेजिंग रखा. काम शुरू करने के बाद उन्हें साइकिल से आर्डर खोजने पड़ते, धीरे-धीरे समय बदलता रहा और संगीता का संगीता का स्ट्रगल भी बढ़ता रहा. आज दुकानदारों को संगीता का डब्बा इतना पसंद आता है कि दूसरे जिले में भी इसकी डिलीवरी होती है. इसके साथ ही उन्होंने करीब 100 महिलाओं को रोजगार भी दिया है. संगीता की फैक्ट्री गोरखपुर के पादरी बाजार स्थित शिवपुर शाहबाजगंज में है. संगीता आज अपनी कंपनी को ढाई करोड़ तक लेकर चली गई हैं.

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Author: Jagran Times

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