पहाड़ी पर बसा यह प्राचीन मंदिर है बेहद चमत्कारी, दीवार पर मन्नते लिखने पर पूरी होती है हर मनोकामना!

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रवि पायक/भीलवाड़ा. राजस्थान प्रदेश अपनी खास मान्यताओं और प्राचीन धरोहर को लेकर पूरे विश्व में मशहूर है. इस कड़ी में हम आपको भीलवाड़ा जिले के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी कहानी रोचक है. जी हां, यह है शहर के अरावली पर्वत श्रेणी के ऊपर स्थित चामुंडा माता मंदिर. 1500 वर्ष पुराने इस मंदिर की एक खासियत यह है कि इस मंदिर में माता रानी की प्रतिमा के पीछे दीवार पर मनोकामनाएं लिखने से वह सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

इस मंदिर से पूरे शहर का नजारा साफ-साफ देखा जा सकता है. इस मंदिर के पीछे दीवार पर मनोकामनाएं लिखी हुई है. यहां कोई नौकरी की मन्नत मांगता है तो कोई पढ़ाई की. यहां पर भक्तों द्वारा अपने परिवार की सुख शांति के लिए भी मन्नते मांगी जाती हैं. मान्यता है कि माता रानी के दर्शन करने से यहां भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी हो जाती हैं. पहले यहां ग्रामीण माता रानी के दरबार में आते धूप लगाते थे, ताकि मां उनकी संकट से रक्षा कर सकें. धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति पूरे जिले में बढ़ती गई और भक्तों का ताता लगातार यहां बढ़ता गया. इस मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था है.

यहां माता रानी खुद हुई अवतरित 

मंदिर में दर्शन करने के लिए आए भक्त बलवंत ने कहा कि 23 सालों से में यहां रोजाना दर्शन करने के लिए आ रहा हूं. यहां किसी के द्वारा लाई गई मूर्ति नहीं है, बल्कि प्राकृतिक रूप से माता रानी यहां पर अवतरित हुई. कहा जाता है कि मंदिर के पीछे बनी सफेद दीवर पर अपनी इच्छाएं लिखने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. कई भक्तों की मनोकामनाएं भी पूरी हुई है. यही कारण है कि आज भी मंदिर के प्रति भक्तों की आस्था बनी हुई है. चामुंडा माता मंदिर के पुजारी भैरूराम कहते हैं कि पिछले 1500 सालों से हमारे परिवार की कई पीढ़ियां माता रानी की पूजा करती आ रही हैं.

मंदिर की रोचक कहानी

मान्यता है कि मां चामुण्डा प्राचीन समय में आसपास के गावों में आने वाले चोरों से सचेत करती थीं. माता गांव वालों को पहाड़ी से ही आवाज लगाकर चोरों के गांव में आने का संदेश देती थी. चोरी नाकाम होने से चोर एक दिन आवाज कहां से आती है, इसका पता लगाने पहाड़ी पर गए और वहां मां चामुण्डा के हाथ पर तलवार से वार कर दिया. आक्रोश में आई माता ने तीन में से दो चोरों की त्रिशूल से गर्दन काटकर ढेर कर दिया. एक चोर माता रानी का त्रिशुल लेकर भागा जो ट्रेन की चपेट में आकर मर गया. इसके बाद वहां पड़े त्रिशूल को रेलवे अधिकारी ने मालखाने में जमा कर दिया. उसी दिन रात को अधिकारी के सपने में माता आई और त्रिशूल को मंदिर में रखने को कहा और अगले दिन भय के मारे अधिकारी वहां त्रिशुल के साथ पहुंचा और माता के दर्शन किए.

(न्यूज़ 18 इसकी पुष्टि नहीं करता है, क्योंकि यह धर्म-आस्था से जुड़ा विषय है. यह सब स्थानीय लोगों की मान्यता है.)

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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